आचार्य चाणक्य के अनुसार: संतुष्ट, सदाचारी और सुखी जीवन
आचार्य चाणक्य के अनुसार, देवी-देवताओं की कृपा से वह आदमी कभी कष्टों को नहीं भोगता है। वह धर्म का पालन करते हुए सदाचारपूर्वक श्रम करता है और जीवन में संतुष्ट रहता है। इस तरह के व्यक्ति को देवी-देवताओं के प्रति उनका अधिकारिक प्रसन्नता होता है।
ऐसे व्यक्ति का जीवन हमेशा आराम में गुजरता है। उसके मन में कोई बोझ नहीं रहता और वह किसी प्रकार की चिंता या असंतोष का सामना नहीं करता है। छोटे-छोटे संकट भी तुरंत उसके लिए हल हो जाते हैं, क्योंकि उसकी शुद्ध और सकारात्मक सोच उसे समस्याओं का समाधान ढूँढने में मदद करती है। इस तरह के व्यक्ति को किसी भी प्रकार के कष्टों का मुख नहीं देखना पड़ता, क्योंकि वह समाधान के लिए हमेशा तत्पर रहता है।
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि समाज के हर वर्ग से इस तरह के व्यक्ति का खूब सम्मान किया जाता है। उनके संतोष करने की आदत ही उन्हें खुशहाल रखती है और उनका परिवार भी सुख-शांति में रहता है।