गीत प्रीत का – सरिता कोहिनूर

गीत प्रीत का

आ मुझको तू गले लगा ले,
मैं राधा बन जी लूँ।
तेरे प्रेम में भिगो चदरिया,
प्रीत का रस मैं पी लूँ।

दे दे साँसों की सरगम तू,
सुर अपने भी साधू।
तेरे नैना बड़े मतवाले
भरा है उनमें जादू।
खुशबू तेरी चंदन भीनी,
मन को है मदमाती।
आलोकिक सोन्दर्य के आगे,
दृष्टि ठहर न पाती।
बंद करूँ नैनों में तुझको,
और अँखियों को सी लूँ।
राधा बन मैं जी लूँ….

मन चाहे मैं मृग सुंदर की, कस्तूरी बन जाऊँ।
अपनी खुशबू में भरमाकर
तुझको खूब रिझाऊँ।
आ मेरे मन बसिया आ जा,
मैं चरणों की दासी।
जनम जनम की प्रीत हमारी,
अँखियाँ मेरी प्यासी।
दर्श दिखा के बाहों में लें,
तुझमें ही खो जाऊँ।
तेरी गोदी में सर रखकर,
सदा को मैं सो जाऊँ।।
सदा को मैं सो जाऊँ।।

सरिता कोहिनूर ?

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