कविता – मॉं महाकाली

शेर पर सवार मात अष्टभुजाओं वाली,
तू ही चंडिका चामुंडा मॉं महाकाली,
दुख हरनी सुख करणी हे जगदंबा मैया,
जगत जननी जय हो आदि शक्ति मैहरोवाली ।
तेरे दर पर करें प्रार्थना माता ज्योतावाली,
कष्टों को मिटा जीवन में ला दो हरियाली,
त्रिभुवनेश्रवरी महाशक्ति हे अंबा मैया,
सुनो पुकार शीश झुकाए खड़ा मात सवाली ।
विघ्न बाधाओं को मॉं दूर करने वाली,
दुष्टों की है काल देवी भक्तों की रखवाली,
परमेश्वरी कृपामयी हे महालक्ष्मी मैया,
भर दो झोली “आनंद” करणी गुफाओं वाली ।
शरण में आने वाले की लाज रखती मातारानी,
सारे शत्रुओं का दमन करती उमा महारानी,
शंख चक्र गदा पद्म कर शोभित हे अष्टभुजी मैया,
खड्ग खप्पर कृपाण नाना अस्त्र-शस्त्र धारिणी ।
सुना है सब अपराध माफ़ करती है पहाड़ों वाली,
विनती सुन लो मेरी भी ऊॅंचे-ऊॅंचे भवनों वाली,
त्रिपुर सुंदरी करूणामयी हे विंध्यवासिनी मैया,
जय जयकार मात तेरी करता हूॅं मंदिरों वाली ।
–  मोनिका डागा “आनंद” , चेन्नई, तमिलनाडु

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