सीधी सादी हिंदी

सीधी- सादी हिंदी
लगती है टेढ़ी-मेढ़ी
टेढ़ी-मेढ़ी अँगेजी
बन जाती है प्यारी।
सब भाषाओं से है न्यारी
हिंदी है पहचान हमारी ।
संस्कृति का आधार है हिंदी
कश्मीर से कन्याकुमारी तक
गुजरात से बंगाल तक
सबको जोड़े भाषा हिंदी।
हिंदी है भावों का संगम
रूप इसका बड़ा अनुपम।
हर भाषा को यह अपनाती
सब भाषा में घुलमिल जाती।
जब अंग्रेजी से मिल जाए तब
हिंदी हिंग्लिश कहलाए ।
नहीं किसी से इसका बैर
रखती है यह सबसे मेल।
छोड़ो दिखावा मेरे भाई
हिंदी को अपनाओ ।
हिंदी को सम्मान दिलाओ
भारत का मान बढ़ाओ।
14 सितंबर हिंदी दिवस की शुभकामनाऐं
– शालिनी श्रीवास्तव “सनशाइन”
(स्वरचित अप्रकाशित मौलिक सृजन)
शिक्षिका,लेखिका
गोरखपुर उत्तर प्रदेश

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