रणजनगांव महागणपति मंदिर: जहां शिव ने गणेश से मांगी शक्ति, त्रिपुरासुर पर पाई विजय
- 📍 पुणे, महाराष्ट्र | विशेष संवाददाता: अभिजीत श्रीवास्तव, मीरजापुर
पुणे जिले के पास स्थित रणजनगांव महागणपति मंदिर न सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि पौराणिक इतिहास का एक ऐसा स्थल भी है, जहां भगवान शिव ने त्रिपुरासुर जैसे महाशक्तिशाली राक्षस पर विजय पाने के लिए भगवान गणेश की आराधना की थी। यह मंदिर महाराष्ट्र के अष्टविनायक तीर्थों में से एक है और श्रद्धालुओं के लिए एक प्रमुख आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
धार्मिक ग्रंथों में वर्णित कथा के अनुसार, गृत्समद ऋषि के पुत्र त्रिपुरासुर ने भगवान गणेश की तपस्या कर तीन नगरों – स्वर्ण, रजत और लौह – का वरदान प्राप्त किया था। वरदान प्राप्त करने के बाद वह तीनों लोकों में आतंक फैलाने लगा। जब देवताओं ने भगवान शिव से सहायता मांगी, तो शिव ने युद्ध किया लेकिन वे असफल रहे।
मान्यता है कि तब भगवान शिव ने रणजनगांव में भगवान गणेश की पूजा की और उनसे विजय का आशीर्वाद मांगा। गणेशजी के आशीर्वाद से ही शिव ने एक ही बाण से त्रिपुरासुर के तीनों नगरों को नष्ट कर दिया। इसके बाद, भगवान शिव ने कृतज्ञता स्वरूप इसी स्थान पर महागणपति मंदिर की स्थापना की।
पुणे से लगभग 51 किलोमीटर दूर स्थित यह मंदिर पूर्वाभिमुख है और इसकी वास्तुकला 9वीं–10वीं शताब्दी की बताई जाती है। मंदिर के मुख्य द्वार पर विशाल द्वारपाल विराजमान हैं। खास बात यह है कि सूर्य के उत्तरायण और दक्षिणायन काल में सूर्य की किरणें सीधे महागणपति की मूर्ति पर पड़ती हैं।
गर्भगृह में भगवान गणेश की स्वयंभू प्रतिमा स्थापित है, जिनकी सूंड दक्षिण दिशा की ओर मुड़ी हुई है। गणेशजी के साथ ऋद्धि और सिद्धि की मूर्तियाँ भी विराजमान हैं। मौजूदा गर्भगृह का निर्माण 1790 ईस्वी में माधवराव पेशवा ने कराया था, जबकि मुख्य मंडप का निर्माण इंदौर के सरदार किबे द्वारा किया गया।
मंदिर में हर साल गणेश चतुर्थी का भव्य आयोजन होता है, जिसमें देशभर से हजारों श्रद्धालु भाग लेते हैं। इसके अलावा, रविवार और बुधवार को भी मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ती है। यह स्थल सिर्फ धार्मिक ही नहीं, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
🧭 रणजनगांव कैसे पहुंचे?
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✈ हवाई मार्ग: नजदीकी हवाई अड्डा पुणे (46 किमी) और मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (195 किमी)।
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🚆 रेल मार्ग: पुणे रेलवे स्टेशन से दूरी लगभग 50 किमी; शिरूर स्टेशन 20 किमी दूर स्थित है।
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🚍 सड़क मार्ग: पुणे-अहमदनगर हाईवे पर स्थित रणजनगांव तक महाराष्ट्र राज्य परिवहन की नियमित बसें उपलब्ध हैं।
रणजनगांव का महागणपति मंदिर न केवल पुणे का धार्मिक गौरव है, बल्कि यह उस पौराणिक गाथा का साक्षी है जहां गणपति बप्पा ने शिव को विजयश्री प्रदान की थी। यह मंदिर आज भी यह संदेश देता है कि भक्ति और श्रद्धा से हर संकट पर विजय संभव है।