कोई राज है – -किशोर छिपेश्वर”सागर”

कोई राज है जो छुपाते गए
वो हमें देखकर मुस्काते गए

हमने सोचा कि मिलाए नजर
जाने क्यों वो नजरें चुराते गए

जमाने से जुदा उनका अंदाज है
हम आँखों मे उनको बसाते गए

बात ही बात में रूठ जाती रही
मान जाएं कहीं हम मनाते गए

मेरे लब पर एक उसी का नाम है
नजदीक उनको हम बुलाते गए

सोचता ही रहा कब उनका दीदार हो
गली हर शहर हम चक्कर लगाते गए

-किशोर छिपेश्वर”सागर”

About Author

यह भी देखें  गीत प्रीत का - सरिता कोहिनूर

Leave a Reply

error: Content is protected !!