सरयूपारीण ब्राह्मण समाज के वार्षिकोत्सव में उमड़ा जनसैलाब, प्रतिभाओं का हुआ सम्मान

  • सरयूपारीण ब्राह्मण समाज के वार्षिकोत्सव में दिखी एकजुटता की मिसाल

जयपुर। राजधानी जयपुर के निर्माण नगर स्थित जिंदल गार्डन में सरयूपारीण ब्राह्मण समाज राजस्थान, जयपुर द्वारा आयोजित स्थापना दिवस समारोह एवं वार्षिकोत्सव अत्यंत भव्यता, गरिमा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम में समाज के सैकड़ों बंधुओं की उपस्थिति ने आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया। राजस्थान के विभिन्न जिलों और संभागों से समाज के प्रतिनिधियों ने इसमें भाग लेकर एकता और सामाजिक सेवा का संकल्प लिया।

कार्यक्रम का सबसे प्रमुख आकर्षण समाज के मेधावी बच्चों और युवाओं का सम्मान समारोह रहा। शैक्षणिक, खेल एवं सांस्कृतिक क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया।
समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने अपने प्रेरक संबोधन में कहा कि संस्कारयुक्त शिक्षा और प्रतिभाओं का सम्मान ही किसी भी समाज की सशक्त नींव होती है।

इस भव्य आयोजन में जयपुर के साथ-साथ जोधपुर संभाग, कोटा, भिवाड़ी, बीकानेर, सवाई माधोपुर, बूंदी, भरतपुर सहित अनेक क्षेत्रों से समाज के पदाधिकारी एवं प्रतिनिधि विशेष रूप से उपस्थित रहे। समाज के अध्यक्ष ओमप्रकाश त्रिपाठी एवं महासचिव सुरेन्द्र प्रसाद चौबे ने सभी अतिथियों का माल्यार्पण कर गर्मजोशी से स्वागत किया।

समारोह में समाज के कई प्रबुद्धजन उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से कोषाध्यक्ष, डॉ. जयनारायण शुक्ल, विजय पांडेय, तुंगनाथ त्रिपाठी, एडवोकेट रवि त्रिपाठी, ए.के. पांडे, रत्नाकर शुक्ला, के.आर. पांडेय और मधुलेश पांडेय सहित सैकड़ों समाजबंधु शामिल हुए। महिला मोर्चा अध्यक्ष नीरज मिश्रा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में मातृशक्ति ने भी कार्यक्रम में सहभागिता कर समाज की सक्रिय भूमिका को सशक्त बनाया।

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अपने अध्यक्षीय संबोधन में ओमप्रकाश त्रिपाठी ने समाज के भविष्य की योजनाओं, संगठन विस्तार और सामाजिक सेवा से जुड़े लक्ष्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। वहीं महासचिव सुरेन्द्र प्रसाद चौबे ने वार्षिक गतिविधियों का विवरण प्रस्तुत करते हुए बताया कि बाहर से पधारे समाजबंधुओं के लिए आवास एवं भोजन की उत्तम व्यवस्था समाज द्वारा की गई थी।

कार्यक्रम के अंत में सामूहिक प्रीतिभोज का आयोजन किया गया। मंच संचालन के दौरान उपस्थित सैकड़ों समाजबंधुओं ने कंधे से कंधा मिलाकर समाज की उन्नति, एकता और सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ने का संकल्प लिया। यह आयोजन न केवल सामाजिक समरसता का प्रतीक बना, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत भी सिद्ध हुआ।

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