शनि देव मौनी अमावस्या के दिन करेंगे राशि परिवर्तन, ढाई साल तक 7 राशियां रहेंगी प्रभावित

  • आज आधी रात को शनि राशि बदलेगा –  कुंभ पर साढ़ेसाती, मिथुन और तुला पर ढैया लगेगी
  • अमावस्या पर खगोलीय घटना भी होगी –  शनि, चंद्रमा और पृथ्वी तीनों एक कतार में होंगे

The News Wala :  24 जनवरी को मौनी अमावस्या पर शनि स्वयं की राशि मकर में प्रवेश कर रहें है। शनि प्रत्येक ढाई साल के बाद राशि परिवर्तन करते हैं। शनि के एक राशि से दूसरी राशि मे जाने से इसका सभी जातकों पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, मौनी अमावस्या पर ऐसा 382 साल बाद हो रहा है। स्वयं की राशि में शनि अधिक ताकतवर और प्रभावशाली हो जाता है। शुक्रवार को अमावस्या के संयोग पर शनि, चंद्रमा के बेहद करीब आ जाएगा। चंद्रमा के पास शनि जीरो डिग्री पर रहेगा। इस तरह पृथ्वी, चंद्रमा और शनि तीनों एक लाइन में आ जाएंगे। जानकारों के अनुसार शनि का चंद्रमा के पास आना सामान्य घटना है, लेकिन इस अमावस्या पर अपनी ही राशि में प्रवेश करते हुए शनि का चंद्रमा के पास आ जाना दुर्लभ संयोग है। बहरहाल,  इस अहम परिवर्तन का सभी राशियों पर असर दिखेगा। वृषभ और कन्या राशि वाले जातक जहां शनि की ढैया से मुक्त होंगे वहीं मिथुन और तुला राशि के जातकों पर ढैया का प्रभाव होगा। आईए, जानते हैं किस राशि पर इस परिवर्तन का क्या होगा असर – मकर राशि में शनि के आने से कुंभ राशि पर साढ़ेसाती शुरू हो जाएगी। धनु और मकर राशि पर पहले से साढ़ेसाती चल रही मिथुन और तुला राशि पर शनि की ढैया रहेगी। यानी तुला राशि पर शनि की टेढ़ी नजर रहेगी और मिथुन राशि के साथ षडाष्टक योग बनेगा। मीन और कर्क राशि पर भी शनि की दृष्टि रहेगी। इस तरह 12 में से 7 राशियां पूरी तरह शनि से प्रभावित रहेंगी। शनि की चाल बदलने से वृश्चिक राशि से साढ़ेसाती खत्म होगी। वृष और कन्या राशि वाले भी शनि की ढैया से मुक्त हो जाएंगे। शनि के राशि परिवर्तन होने से धनु राशि पर साढ़ेसाती तो रहेगी, लेकिन इस राशि वालों पर शनि का अशुभ प्रभाव नहीं रहेगा। धनु राशि पर साढ़ेसाती के आखिरी ढाई साल होने से तरक्की, पद, प्रतिष्ठा और धन लाभ के योग बन रहे हैं।

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आख़िर क्या है मौनी अमावस्या  –  गोरखपुर विश्व विद्यालय के संस्कृत विभाग के अध्यक्ष प्रो० मुरली मनोहर पाठक के अनुसार इसी दिन मनु ऋषि का जन्म माना जाता है। इसलिए इस अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता है। मकर राशि, सूर्य तथा चंद्रमा का योग  इसी दिन होता है अत: इस अमावस्या का महत्व और बढ़ जाता है।

मौनी अमावस्या के मुहूर्त :

24 जनवरी 2020 को 02:19:25 से अमावस्या आरंभ

25 जनवरी 2020 को 03:13:36 पर अमावस्या समाप्त होगी।

इस दिन व्यक्ति विशेष को मौन व्रत रखने का भी विधान रहा है। इस व्रत का अर्थ है कि व्यक्ति को अपनी इन्द्रियों को अपने वश में रखना चाहिए। धीरे-धीरे अपनी वाणी को संयत करके अपने वश में करना ही मौन व्रत है। कई लोग इस दिन से मौन व्रत रखने का प्रण करते हैं। वह व्यक्ति विशेष पर निर्भर करता है कि कितने समय के लिए वह मौन व्रत रखना चाहता है। कई व्यक्ति एक दिन, कोई एक महीना और कोई व्यक्ति एक वर्ष तक मौन व्रत धारण करने का संकल्प कर सकता है। इस दिन मौन व्रत धारण करके ही स्नान करना चाहिए। वाणी को नियंत्रित करने के लिए यह शुभ दिन होता है। मौनी अमावस्या को स्नान आदि करने के बाद मौन व्रत रखकर एकांत स्थल पर जाप आदि करना चाहिए। इससे चित्त की शुद्धि होती है। आत्मा का परमात्मा से मिलन होता है। मौनी अमावस्या के दिन व्यक्ति स्नान तथा जप आदि के बाद हवन, दान आदि कर सकता है। ऎसा करने से पापों का नाश होता है। इस दिन गंगा स्नान करने से अश्वमेघ यज्ञ करने के समान फल मिलता है।

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माघ मास की अमावस्या तिथि और पूर्णिमा तिथि दोनों का ही महत्व इस मास में होता है। इस मास में यह दो तिथियां पर्व के समान मानी जाती हैं। समुद्र मंथन के समय देवताओं और असुरों के मध्य संघर्ष में जहां-जहां अमृत गिरा था, उन स्थानों पर स्नान करना पुण्य कर्म माना जाता है। मौनी अमावस्या के दिन व्यक्ति को अपने सामर्थ्य के अनुसार दान, पुण्य तथा जाप करने चाहिए। यदि किसी व्यक्ति की सामर्थ्य त्रिवेणी के संगम अथवा अन्य किसी तीर्थ स्थान पर जाने की नहीं है, तब उसे अपने घर में ही प्रात: काल उठकर दैनिक कर्मों से निवृत होकर स्नान आदि करना चाहिए अथवा घर के समीप किसी भी नदी या नहर में स्नान कर सकते हैं। पुराणों के अनुसार इस दिन सभी नदियों का जल गंगाजल के समान हो जाता है। स्नान करते हुए मौन धारण करें और जाप करने तक मौन व्रत का पालन करें।

इस दिन व्यक्ति प्रण करें कि वह झूठ, छल-कपट आदि की बातें नहीं करेंगे। इस दिन से व्यक्ति को सभी बेकार की बातों से दूर रहकर अपने मन को सबल बनाने की कोशिश करनी चाहिए। इससे मन शांत रहता है और शांत मन शरीर को सबल बनाता है। इसके बाद व्यक्ति को इस दिन ब्रह्म देव तथा गायत्री का जाप अथवा पाठ करना चाहिए। मंत्रोच्चारण के साथ अथवा श्रद्धा-भक्ति के साथ दान करना चाहिए।

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