कीर्ति की कलम – सुरज का पैग़ाम

हर डूबता सुरज एक पैग़ाम देता हैं
मैं डूब रहा हु तो
कल फिर उगने के लिए।
नया दिन
नया आयाम,
नया पैगाम देने के लिए।
नया सवेरा,
नई उमंग,
नई तरंग
भरने ज़िन्दगी के लिए,
भोर होते ही पक्षी
गुनगुनाते हैं,
बगिया में फूल भी खिल जाते है।
हर भोर के साथ,
प्रभु दर्शन मिल जाते हैं।
हर नई सुबह,
एक आशा हैं,
नई चुनौती है।
उठना हैं, चलना है,
फिर ज़िन्दगी को जीना है।।
कीर्ति देवानी
नागपुर महाराष्ट्र

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