इन्टरनेट बंद करना समस्या का समाधान नहीं

  •  1975 में इंदिरा गांधी सरकार से थोडा अलग ये डिजिटल इमरजेंसी है। 1975 में कोई सरकार के खिलाफ न कुछ बोल सकता था, न लिख सकता था। देश अदृश्य जेल में था। आम आदमी के सारे अधिकार सस्पेंड कर दिए गए थे।  47 साल बाद राजस्थान में वैसा ही माहौल है।
  • कश्मीर के बाद राजस्थान दूसरा राज्य है, जहां सबसे ज्यादा इंटरनेट बंद होता है। पिछले तीन दिन से करोड़ों राजस्थानी डिजिटल कैद झेल रहे हैं।
  • नेटबंदी के नाम पर सरकार ने मौलिक अधिकार छीन लिए हैं।

एम के निल्को , जयपुर । राजस्थान के उदयपुर शहर में हुई खौफनाक हत्या से हालात को ठीक रखने के प्रयास से इंटरनेट सेवा को बंद करने का विकल्प अपनाया गया है। झूठे-भ्रामक समाचार और समाज में नफरत फैलाने वाली खबरों को वायरल होने से रोकने की दृष्टि से यह भले सही कदम हो, इंटरनेट बंद करना लोगों की दिनचर्या को पूरी तरह बंद कर देने जैसा है। डिजिटल दैनिक संस्थाओं के अनुसार इंटरनेट शटडाउन एक तरह का मानवाधिकार उल्लंंघन है। सुप्रीम कोर्ट की जनवरी 2020 में की गई टिप्पणी में कहा गया है कि  इंटरनेट संविधान के अनुच्छेद-19 के तहत लोगों का मौलिक अधिकार है। यानी यह जीने के हक जैसा ही जरूरी है। इंटरनेट को अनिश्चितकाल के लिए बंद नहीं किया जा सकता।

राजस्थान में इन्टरनेट पिछले 3 दिनों से बंद है, दरअसल उदयपुर में दर्जी हत्याकांड  के बाद 28 जून की रात को बंद किये गए इंटरनेट सेवा को आज कुछ जिलों में बहाल किया गया लेकिन राजधानी सहित कई जगह अभी भी इन्टरनेट सेवा पूरी तरह से बंद हैं । प्रदेश में इंटरनेट बंद होने से लोगों को खासी दिक्क्त का समाना करना पड़ रहा है। कई भर्ती परीक्षा के अभ्यर्थियों के प्रवेश पत्र डाउनलोड नहीं होने से उन्हें परेशानी उठानी पड़ रही है वहीँ बाजार में ऑनलाइन ट्रांजेक्शन नहीं हो पाने के कारण दुकानदार व ग्राहकों को भी काफी दिक्कतें हो रही हैं । इंटरनेट सेवा बंद रहने के कारण प्रदेश में करोड़ों रुपए के व्यापार का नुकसान भी हो रहा हैं ।

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आप को बता दे की नेटबंदी भारत को ही नहीं बल्कि पुरे विश्व को परेशान किए हुए है। संयुक्त राष्ट्र संघ समर्थित एक रिपोर्ट का दावा है कि इंटरनेट ‘शटडाउन’ के पीछे जो भी मकसद रहा हो, इससे करोड़ों लोग प्रभावित होते हैं। आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार भारत में इंटरनेट शटडाउन की लागत भी बढ़ती जा रही है। 2020 के 0.31 डॉलर प्रति मिनट नुकसान की तुलना में यह 2021 में 0.50 डॉलर प्रति मिनट हो गई।

इन्टरनेट बंदी पर जयपुर के युवाओं का कहना है कि सरकार ने विगत 72 घंटों से इंटरनेट सेवा बंद कर आम आदमी के मूल अधिकारों का हनन किया है, जो सरकार की नाकामी को दर्शा रहा है। युवाओं ने राजस्थान  के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से सवाल करते हुए कहा कि क्या इंटरनेट सेवा बंद किए जाने से ऐसी घटनाओं पर नियंत्रण लग जाएगा? इस तरह के कदम से साफ है कि सरकार साइबर अपराध को नियंत्रित करने में भी विफल है। अफवाहें फैलाने वाले अब भी ब्रॉडबैंड कनेक्शन की मदद से सोशल मीडिया पर जहर उगल रहे हैं।  सरकार अगर सोशल मीडिया ऐप बंद कर देती तो अफवाहें फैलाने का या धार्मिक जहर फैलाने का हर जरिया बंद हो जाता, लेकिन सरकार ने इंटरनेट बंद करने का रास्ता चुना जिसकी खामियाजा करोड़ों राजस्थानी भुगत रहे हैं। सरकार को नेटबंदी का दर्द जानना है तो उन कैब ड्राइवर से मिलना चाहिए, जिनकी रोजी-रोटी दो दिन से छिनी हुई है, या फूड डिलीवरी बॉय जो दो दिन से काम नहीं कर पा रहा, या वो 6 करोड़ लोग जो 2 दिन में 120 करोड़ रुपए का नुकसान झेल चुके हैं।

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