एसपी संजीव सुमन: देवरिया के नये पुलिस अधीक्षक

उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग में कई ऐसे अधिकारी हैं जिन्होंने अपनी निष्ठा, साहस और कठोर निर्णयों से समाज में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इनमें से एक नाम है संजीव सुमन का, जो 2014 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। हाल ही में सितंबर 2025 में उन्हें देवरिया का पुलिस अधीक्षक (एसपी) नियुक्त किया गया है। संजीव सुमन ने अपने करियर की शुरुआत से ही विभिन्न जिलों में अपनी कुशल नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया है। उनका जन्म 30 नवंबर 1986 को बिहार के खगड़िया जिले में हुआ था। कंप्यूटर साइंस में बीटेक की डिग्री हासिल करने के बाद, उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा में सफलता प्राप्त कर आईपीएस बनने का सपना साकार किया। इस लेख में हम एसपी संजीव सुमन के जीवन, करियर और योगदान पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

संजीव सुमन का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ था, जहां शिक्षा और अनुशासन को सर्वोच्च महत्व दिया जाता था। बिहार के खगड़िया जिले में पले-बढ़े संजीव ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय स्तर पर पूरी की। गणित और विज्ञान में उनकी रुचि ने उन्हें इंजीनियरिंग की ओर आकर्षित किया। उन्होंने कंप्यूटर साइंस में बीटेक की उपाधि प्राप्त की, जो आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में उनकी समझ को दर्शाती है। हालांकि, उनका असली जुनून समाज सेवा और कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करने में था। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में सफलता प्राप्त कर वे 2014 बैच के आईपीएस अधिकारी बने। यह उपलब्धि उनके कठिन परिश्रम और दृढ़ संकल्प का प्रमाण है।

आईपीएस बनने के बाद संजीव सुमन ने उत्तर प्रदेश पुलिस में अपनी सेवा की शुरुआत की। उनकी पहली महत्वपूर्ण पोस्टिंग बागपत जिले में असिस्टेंट एसपी के रूप में हुई, जहां उन्होंने दिसंबर 2016 से अप्रैल 2018 तक सेवा दी। इस दौरान उन्होंने स्थानीय स्तर पर अपराध नियंत्रण और जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सक्रिय भूमिका निभाई। 2018 में उन्हें कानपुर जिले में एडिशनल एसपी के पद पर स्थानांतरित किया गया, जहां उन्होंने शहर की कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई अभियान चलाए। इन अभियानों में अपराधियों पर नकेल कसना और नागरिकों के बीच विश्वास बढ़ाना शामिल था।

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अक्टूबर 2019 से दिसंबर 2020 तक वे हापुड़ के एसपी रहे। इस दौरान उन्होंने जिले में शांति बनाए रखने के लिए विशेष प्रयास किए। हापुड़ जैसे संवेदनशील क्षेत्र में उनकी कुशलता ने उन्हें उच्च अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया। उसके बाद, वे लखनऊ में डीसीपी (ईस्ट) के पद पर तैनात हुए, जहां उन्होंने राजधानी के पूर्वी हिस्से में अपराध दर को कम करने में सफलता प्राप्त की।

संजीव सुमन का करियर कई ऊंचाइयों और कुछ विवादों से भरा रहा है। नवंबर 2021 में उन्हें लखीमपुर खीरी का एसपी बनाया गया। यह पोस्टिंग एक संवेदनशील समय पर आई, जब जिले में पहले ही कुछ घटनाएं चर्चा में थीं। अक्टूबर 2021 में लखीमपुर खीरी में दो नाबालिग बहनों के साथ हुई दर्दनाक घटना ने उन्हें सुर्खियों में ला दिया। इस घटना के बाद एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें एसपी सुमन पीड़ित परिवार से बातचीत कर रहे थे। वीडियो में उनके शब्दों को लेकर विवाद हुआ, जिसके कारण उन्हें स्थानांतरित कर दिया गया। लेकिन यह घटना उनके करियर को रोक नहीं सकी।

विवाद के बावजूद, संजीव सुमन ने अपनी क्षमता सिद्ध की। जनवरी 2023 में उन्हें मुजफ्फरनगर का एसएसपी नियुक्त किया गया। मुजफ्फरनगर जैसे जटिल सामाजिक संरचना वाले जिले में उन्होंने कानून-व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए कई कदम उठाए। किसान आंदोलन और अन्य सामाजिक मुद्दों के बीच उन्होंने शांति बनाए रखी। जनवरी 2024 में एक और बड़े तबादले में उन्हें अलीगढ़ का एसएसपी बनाया गया। अलीगढ़, जो अपनी सांप्रदायिक संवेदनशीलता के लिए जाना जाता है, में एसएसपी सुमन ने अपराध नियंत्रण पर विशेष जोर दिया। उनके नेतृत्व में पुलिस ने कई सफल अभियान चलाए, जिनमें नशीले पदार्थों की तस्करी और संगठित अपराध पर कार्रवाई शामिल है।

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सितंबर 2025 में उत्तर प्रदेश सरकार ने एक बड़े प्रशासनिक फेरबदल में संजीव सुमन को देवरिया का पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया। यह नियुक्ति 16 अन्य आईपीएस अधिकारियों के तबादले के साथ हुई, जिसमें कई प्रमुख जिलों में बदलाव किए गए। देवरिया, जो सामाजिक और सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील जिला है, में उनकी नियुक्ति से उम्मीद की जा रही है कि वे जिले में कानून-व्यवस्था को और मजबूत करेंगे। उनकी तकनीकी पृष्ठभूमि और अनुभव को देखते हुए, वे डिजिटल तकनीक और आधुनिक पुलिसिंग तकनीकों का उपयोग कर अपराध जांच को और प्रभावी बनाने की दिशा में काम करेंगे। उनकी यह नई जिम्मेदारी उनके नेतृत्व और प्रशासनिक कौशल को एक बार फिर साबित करने का अवसर प्रदान करेगी।

संजीव सुमन का करियर विवादों से भी अछूता नहीं रहा। लखीमपुर खीरी की घटना के बाद वायरल वीडियो ने उन्हें आलोचना का शिकार बनाया। वीडियो में वे पीड़ित मां से कहते सुनाई दिए, “जो करना है कर लो, लाशें तो वापस नहीं आएंगी।” इस बयान को असंवेदनशील माना गया, जिसके कारण राजनीतिक और सामाजिक बहस छिड़ गई। हालांकि, अधिकारियों ने इसे जांच का विषय बनाया, लेकिन सुमन ने बाद में अपनी स्थिति स्पष्ट की। इस घटना से पुलिस अधिकारियों को पीड़ितों से संवाद करते समय अधिक संवेदनशीलता बरतने का सबक मिला।

विवादों के बावजूद, संजीव सुमन ने कभी हार नहीं मानी। उन्होंने अपने काम पर ध्यान केंद्रित रखा और उच्च पदों पर पहुंचे। यह दर्शाता है कि एक अधिकारी को चुनौतियों का सामना करते हुए भी ईमानदारी से काम करना चाहिए।

एसपी संजीव सुमन एक ऐसे अधिकारी हैं जिन्होंने बाधाओं को पार कर अपनी पहचान बनाई है। उनकी यात्रा से हमें यह सीख मिलती है कि समर्पण और कड़ी मेहनत से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। समाज में कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाले इन योद्धाओं का सम्मान करना हमारा कर्तव्य है। संजीव सुमन जैसे अधिकारियों की बदौलत ही हमारा देश सुरक्षित रहता है। उनकी यात्रा युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत है, जो सिविल सेवा में जाना चाहते हैं।

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