सिमटने लगे अखबार, बन्द होंगे कई दफ्तर

लखनऊ। पाठकों में एक छत्र छाने वाले अख़बार भी सिमटने लगे हैं। कोविड 19 के संक्रमणकाल में अख़बार के व्यवसाय पर भी असर पड़ा है। जो अख़बार 20 से 24 पेज के छपते थे वे 12 पेज पर सिमट गए हैं। इन सबके बावजूद कुछ अख़बारों ने दाम भी नहीं घटाए। जिले वाईज एडिशन निकालने वाले दैनिक अखबारों में जहाँ चार से छह पेज तक स्थानीय खबरें होती थीं अब एक पेज में सिमट गए। तीन-तीन जिलों को जोड़कर एक एडिशन निकल रहा। वैसे भी अख़बारों के दिन खराब हो गए हैं। आने वाले समय में अच्छे अच्छे अख़बारों के तहसील व जिले के कार्यालय में ताला लग जाय तो किसी को आश्चर्य नहीं करना होगा। अख़बारों ने मन्दी के इस दौर में अपने कई कार्यालय बन्द करने का मन बना लिया है। जिले और तहसील कार्यालयों में कार्यरत पत्रकारों को बाहर का रास्ता दिखाने की तैयारी हो रही है। मानदेय पर काम करने वाले पत्रकारों को बाहर किया जाएगा तो भी आश्चर्य न कीजिये। वैसे भी अख़बारों में अब बचा ही क्या है। सारा मसाला तो सोशल मीडिया पर एक दिन पूर्व ही मिल जाता है।

खबर है कि कम कमाई करने वाले ब्यूरो ऑफिसेज पर दो बड़े अखबारों ने गाज गिरानी शुरू कर दी है। यूपी में दर्जन भर से ज्यादा ब्यूरो ऑफिसों पर ताला लगाने का फरमान जारी कर दिया गया है। एक अख़बार के वाराणसी संस्करण से जुड़े पांच ब्यूरो कार्यालय बंद करने का ऐलान हो चुका है। ये जिले हैं- गाजीपुर, सोनभद्र, भदोही, मऊ और चंदौली। बताया जाता है कि अब इन जिलों में वर्क फ्रॉम होम कल्चर के जरिए काम होगा। गोरखपुर से निकलने वाले एक बड़े अख़बार के देवरिया जिले में बरहज, रुद्रपुर और भाटपाररानी तहसील कार्यालय बन्द होंगे। बताया जाता है कि लॉक डाउन अवधि में रेवेन्यू कम होने और वर्क फ्रॉम होम कल्चर से काम सफल तरीके से होने के चलते मैनेजरों ने प्रयोग के तौर पर उन ब्यूरो ऑफिसों को बन्द किया है जो न्यूनतम बिजनेस जनरेट करते थे। ये प्रयोग सफल रहा तो हर यूनिट के न्यूनतम रेवेन्यू जनरेट करने वाले ब्यूरो ऑफिसेज पर देर सबेर गाज गिराने की तैयारी है। जाहिर है, कई पत्रकारों की छंटनी भी होगी।
अगर हालात नहीं सुधरे तो जिले और तहसीलों पर आफिस में बैठकर अपनी दुकानदारी चमकाने वाले पत्रकार बेरोजगार हो जाएंगे। फिलहाल अभी कोई अख़बार मन्दी के इस दौर में उबरता नहीं दिख रहा। हाँ यह जरूर है कि संकट के इस काल में जो अख़बार मार्केट में जमा रह गया वही रहेगा भी। अख़बार यदि पहले की तरह लोकल खबरों को चार से छह पेज नहीं देना शुरू किये तो लोग अख़बार भी लेना बन्द कर देंगे। पूर्वांचल के गोरखपुर से निकलने वाले एक बड़े अख़बार की हालत सबसे बुरी है। वह एक जिले में एक ही पेज लोकल खबर दे रहा है, जबकि उसके प्रतिस्पर्धी अख़बार दो से तीन पेज इस संकटकालीन स्थिति में भी अपने पाठकों को दे रहे हैं।
-पुरुषोत्तम सिंह

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