स्वतन्त्रता आंदोलन के सेनानियों का यह अपमान नहीं तो क्या है?

 

*पांडेय एन डी देहाती की रिपोर्ट*

देवरिया। आज 26 जनवरी है। गणतंत्र दिवस है। देवरिया में महोत्सव की बहार है। समूचा राष्ट्र गणतन्त्र के राष्ट्रीय पर्व पर राष्ट्रीयता के गौरवान्वित क्षणों को याद कर रहा है। देश की आन के खातिर अपनी जान न्योछावर करने वाले वीर सपूतों को हम नमन कर रहे। देश की आजादी में स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। बड़े कष्ट के साथ यह बताना पड़ रहा है कि देवरिया के ही सोनूघाट में देश के सम्मानित स्वतन्त्रता सेनानियों के सम्मान में स्थापित शिलालेख आज राष्ट्रीय पर्व पर भी अपनी स्थिति पर आंसू बहा रहा है। महोत्सवों में सुर, संगीत के उत्सव में लाखों-करोड़ों खर्च करने वाले लोंगों का यदि थोडा सा भी ध्यान इन स्वतन्त्रता सेनानियों के सम्मान की तरफ भी पड़ जाता तो हमें गर्व होता।

देवरिया सदर विकास खंड के सोनूघाट चौराहे पर स्वतन्त्रता संग्राम के सेनानियों का एक शिलापट बहुत पहले से लगा था। लोकनिर्माण विभाग द्वारा चौराहे के चौड़ीकरण तथा सुन्दरीकरण के दौरान शिला पट्ट पर एक विशाल पेड़ गिर जाने से वर्षों पुराना शिला पट्ट ध्वस्त हो गया। क्षेत्रीय नागरिकों द्वारा आपत्ति दर्ज की गई तो अवर अभियंता ने आश्वासन दिया कि नया शिलापट लगवा देंगे। आज तक शिलापट नहीं लगा। न लोकनिर्माण विभाग को चिंता है। न जिला प्रशासन को फ़िक्र है। और तो और किसी जनप्रतिनिधि ने भी सेनानियों के गौरव स्तम्भ को पुनर्स्थापित करने का कार्य नहीं किया। आज राष्ट्रीय पर्व पर हम उन सेनानियों के सम्मान में सर झुकाते हैं। जय हिन्द।

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