बारिश में भी अटूट आस्था, डिग्गी कल्याणजी की पदयात्रा में श्रद्धालुओं का उत्साह- The Newswala
- नाचते-गाते और जयकारों के साथ लाखों भक्तों की डिग्गी कल्याणजी पदयात्रा, सावन में भक्ति का अनोखा माहौल
जयपुर, 31 जुलाई 2025: राजस्थान की राजधानी जयपुर से शुरू होने वाली प्रसिद्ध डिग्गी कल्याणजी की लक्खी पदयात्रा गुरुवार को भारी बारिश के बावजूद पूरे उत्साह और भक्ति के साथ रवाना हुई। लाखों श्रद्धालु, भगवान कल्याणजी के जयकारों और भजनों की स्वर लहरियों के साथ, जयपुर से टोंक जिले के मालपुरा स्थित डिग्गी कल्याणजी मंदिर की ओर बढ़ रहे हैं। बारिश ने भी भक्तों की आस्था को डगमगा नहीं पाया, और नाचते-गाते श्रद्धालु इस धार्मिक यात्रा में शामिल हो रहे हैं।
डिग्गी कल्याणजी की यह पदयात्रा, जो अब 60 साल पुरानी परंपरा बन चुकी है, एक परिवार की मन्नत से शुरू हुई थी। 1965 में जयपुर के एक कारोबारी रामेश्वर शर्मा ने पुत्र प्राप्ति की मन्नत मांगी थी, और उनकी मन्नत पूरी होने पर यह यात्रा शुरू हुई। तब से हर साल सावन के महीने में यह यात्रा निकाली जाती है। आज उनके पुत्र श्रीजी इस यात्रा की अगुवाई करते हैं, और उनकी पुरानी कार को यात्रा के प्रचार और आस्था के प्रतीक के रूप में उपयोग किया जाता है।
यह यात्रा जयपुर के चौड़ा रास्ता स्थित ताड़केश्वर महादेव मंदिर से शुरू होकर न्यू गेट, रामनिवास बाग, टोंक फाटक, और सांगानेर होते हुए मालपुरा के डिग्गी कल्याणजी मंदिर तक पहुंचती है। रास्ते में भक्त मोती डूंगरी गणेश जी मंदिर और सांगानेर में संग बाबा मंदिर में दर्शन करते हैं। यात्रा चार दिनों तक चलती है, जिसमें रेनवाल, बांडी नदी, और चौसाला जैसे पड़ाव शामिल हैं। अंतिम दिन भक्त डिग्गी में भगवान कल्याणजी के दर्शन करते हैं। रास्ते भर फूलों की वर्षा, इत्र छिड़काव, और भंडारों का आयोजन होता है, जो यात्रा को और भव्य बनाता है।
इस साल भारी बारिश ने यात्रा को चुनौती दी, लेकिन श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ। जयपुर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से आए लाखों भक्त बारिश में भीगते हुए, भजनों की स्वर लहरियों और “डिग्गीपुरी के राजा” के जयकारों के साथ आगे बढ़ रहे हैं। कई भक्त पिछले 30 सालों से इस यात्रा में हिस्सा ले रहे हैं, और 80 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग भी पूरे धार्मिक उत्साह के साथ शामिल हैं।
यात्रा मार्ग पर जगह-जगह सेवा शिविर लगाए गए हैं, जहां भक्तों को फल, जल, जूस, और दवाइयां उपलब्ध कराई जा रही हैं। कुछ लोग भक्तों के पैर दबाते हैं, तो कुछ पानी और भोजन की व्यवस्था करते हैं। जयपुर नगर निगम ने भी यात्रा मार्ग पर रियल-टाइम सफाई की व्यवस्था की है, जिससे यात्रा के दौरान स्वच्छता बनी रहे। यह सेवा और संकल्प की भावना इस पदयात्रा को और विशेष बनाती है।
प्रशासन ने यात्रा के लिए व्यापक तैयारियां की हैं, लेकिन भारी बारिश ने सड़क मार्ग को प्रभावित किया है। कुछ क्षेत्रों में सड़कों की स्थिति खराब होने की शिकायतें भी सामने आई हैं। एक स्थानीय निवासी ने सोशल मीडिया पर लिखा, “इस बार पदयात्रा मुश्किलों भरी है। सड़क मार्ग के हाल खराब हैं, और बारिश ने सब बहा दिया।” इसके बावजूद, भक्तों का उत्साह और प्रशासन की सक्रियता ने यात्रा को सुचारू रखा है।
डिग्गी कल्याणजी की यह यात्रा केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि सामाजिक एकजुटता का भी उदाहरण है। भगवान कल्याणजी, जिन्हें भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है, के प्रति भक्तों की अटूट श्रद्धा इस यात्रा को जीवंत बनाती है। मंदिर की स्थापना लगभग 6000 साल पहले राजा डिग्वा ने की थी, जिन्हें कुष्ठ रोग से मुक्ति मिली थी। तब से यह मंदिर और यात्रा भक्तों के लिए आस्था का केंद्र बनी हुई है।
यात्रा के समापन पर मालपुरा के डिग्गी कल्याणजी मंदिर में विशाल भंडारे और धार्मिक आयोजनों का आयोजन किया जाएगा। भक्तों द्वारा भगवान कल्याणजी को विशेष प्रसाद चढ़ाया जाएगा, और मंदिर परिसर में भक्ति का अनोखा माहौल देखने को मिलेगा।
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