राजस्थान में 7 सालों से UPSC टॉपर नहीं, टॉप-10 में भी कैंडिडेट्स की कमी
राजस्थान, जो कभी शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं का गढ़ माना जाता था, पिछले सात सालों से संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) सिविल सेवा परीक्षा में शीर्ष स्थान हासिल करने में पिछड़ रहा है। 2018 से 2024 तक के UPSC रिजल्ट्स पर नजर डालें तो राजस्थान से न तो कोई ऑल इंडिया टॉपर रहा और न ही टॉप-10 में कोई कैंडिडेट जगह बना पाया। यह स्थिति तब और चिंताजनक लगती है, जब कोटा और जयपुर जैसे शहर देश में UPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए प्रमुख केंद्र माने जाते हैं।
2018 में जयपुर के कनिष्क कटारिया ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा में पहला स्थान हासिल कर राजस्थान का नाम रोशन किया था। हालांकि, इसके बाद से 2019 से 2024 तक के रिजल्ट्स में राजस्थान के कैंडिडेट्स टॉप-10 में भी स्थान बनाने में असफल रहे। 2024 में प्रयागराज की शक्ति दुबे ने ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल की, जबकि टॉप-10 में उत्तर प्रदेश, गुजरात और अन्य राज्यों के कैंडिडेट्स ने जगह बनाई।
मौजूदा रुझानों के अनुसार, राजस्थान के छात्र JEE मेन जैसी इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं में शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। 2025 में JEE मेन में राजस्थान के 7 छात्रों ने 100 पर्सेंटाइल स्कोर हासिल किया। लेकिन UPSC जैसी परीक्षा में अपेक्षित सफलता नहीं मिल पा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका कारण UPSC की बदलती पैटर्न, कठिन इंटरव्यू प्रक्रिया और तैयारी के लिए संसाधनों की कमी हो सकता है।
जयपुर और कोटा में UPSC की कोचिंग देने वाले संस्थानों का कहना है कि राज्य के छात्रों में प्रतिभा की कमी नहीं है, लेकिन प्रीलिम्स और मेन्स के बीच संतुलन बनाना उनके लिए चुनौतीपूर्ण हो रहा है। इसके अलावा, इंटरव्यू में उच्च स्कोरिंग की कमी भी टॉप रैंक से वंचित कर रही है। उदाहरण के लिए, 2023 के टॉपर आदित्य श्रीवास्तव ने इंटरव्यू में रिकॉर्ड 200 अंक हासिल किए, जो पिछले 10 सालों में सबसे अधिक थे।
शिक्षा विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि राजस्थान के UPSC अभ्यर्थियों को नई रणनीतियों, जैसे नियमित मॉक टेस्ट, उत्तर लेखन अभ्यास और सॉफ्ट स्किल्स पर ध्यान देना चाहिए। साथ ही, राज्य सरकार को भी UPSC की मुफ्त कोचिंग और मेंटरशिप प्रोग्राम्स को बढ़ावा देना चाहिए, ताकि प्रतिभाशाली छात्रों को बेहतर अवसर मिल सकें।
राजस्थान के युवाओं के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण स्थिति है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि सही दिशा में प्रयास और संसाधनों के बेहतर उपयोग से राज्य फिर से UPSC में अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा हासिल कर सकता है।