माँ है मेरी जग से निराली
माँ है मेरी जग से निराली
लट है उसकी घूँघराली
कानो मे लटकी उसकी बाली…।
माँ है मेरी जग से निराली
उसके हाथों मे है कुल्हाड़ी
फसलों मे वो डाले है पानी…।
माँ है मेरी जग से निराली
बच्चे को गोदी मे है संभाली
फिर भी सब देते है उसको गाली…।
माँ है मेरी जग से निराली
उसकी आँखों से बहता अश्रु पानी
न जाने कैसे सिमटी उसकी कहानी…।
माँ है मेरी जग से निराली
उसने हाथों से है थामी उँगली
मुझको लगती है वह बड़ी प्यारी…।
माँ है मेरी जग से निराली
वह संभाले चूल्हा चौका और थाली
अपने हाथों से बनाती भोजन तरकारी…।
माँ है मेरी जग से निराली
वो दिन रात करे है मैरी रखवाली
हर कोई समझे उसको नखरे वाली…।
माँ है मेरी जग से निराली
सब के बीच फिर भी रह जाती अकेली
उसके बिना न तो घर है न ही हवेली…।
– अन्जू परिहार

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जय श्री कृष्ण! जय गौमाता! 🙏

साथियों,
VMW TEAM FOUNDATION का यह अटूट संकल्प है कि हर महीने के अंतिम रविवार को हम अपनी गौमाताओं की सेवा के लिए एकत्रित हों। इसी कड़ी में, इस रविवार को हम गौशाला में हरे चारे की विशेष व्यवस्था कर रहे हैं।
गाय हमारी संस्कृति और आस्था का केंद्र है। उनकी सेवा से मिलने वाला संतोष और पुण्य अतुलनीय है।
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आइए, मिलकर पुण्य के इस कार्य को सफल बनाएं।

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