उठक-बैठक विवाद के बाद IAS रिंकू सिंह राही का तबादला, राज

  • वकीलों के विरोध के बाद वायरल वीडियो ने मचाई हलचल, 36 घंटे में हटाए गए SDM रिंकू सिंह राही

लखनऊ, 31 जुलाई 2025: उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में पुवायां तहसील के उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (SDM) के रूप में नियुक्त IAS अधिकारी रिंकू सिंह राही को मात्र 36 घंटे की सेवा के बाद हटा दिया गया है। यह कार्रवाई तब हुई जब उनका वकीलों के सामने कान पकड़कर उठक-बैठक करने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। 2022 बैच के IAS अधिकारी राही को अब लखनऊ में राजस्व परिषद (Revenue Board) से संबद्ध किया गया है।

रिंकू सिंह राही ने 28 जुलाई 2025 को देर रात 11 बजे पुवायां SDM के रूप में कार्यभार ग्रहण किया था। अगले दिन, 29 जुलाई को तहसील परिसर का निरीक्षण करते समय उन्होंने एक वकील के क्लर्क, विजय (38), को तहसील की दीवार के पास खुले में शौच करते देखा। राही ने क्लर्क को डांटते हुए उसे कान पकड़कर उठक-बैठक करने को कहा, ताकि अनुशासन का पाठ पढ़ाया जा सके।

इस घटना की जानकारी पास में धरना दे रहे वकीलों को हुई, जिन्होंने SDM के इस कदम का विरोध किया। वकीलों ने तहसील परिसर में गंदे शौचालयों और खराब स्वच्छता व्यवस्था का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि जब सुविधाएं ही अपर्याप्त हैं, तो क्लर्क को दंडित करना कहां तक उचित है। तनाव बढ़ने पर वकीलों ने राही से खुद उठक-बैठक करने की मांग की।

विवाद के बीच, राही ने तहसील प्रशासन की कमियों को स्वीकार किया और एक असामान्य कदम उठाते हुए खुद कान पकड़कर पांच उठक-बैठक कीं। उन्होंने कहा, “अगर मैं दूसरों से नियमों का पालन करने की उम्मीद रखता हूं, तो मुझे भी उनका पालन करना चाहिए।” राही ने यह भी वादा किया कि तहसील में शौचालयों की सफाई और स्वच्छता व्यवस्था में सुधार के लिए तत्काल कदम उठाए जाएंगे।

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इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसने प्रशासनिक और कानूनी हलकों में व्यापक चर्चा को जन्म दिया। कुछ लोगों ने राही की विनम्रता और जवाबदेही की सराहना की, जबकि अन्य ने इसे एक अधिकारी की गरिमा से समझौता और प्रशासनिक अक्षमता का प्रतीक बताया।

उत्तर प्रदेश सरकार ने इस घटना को गंभीरता से लिया और राही के कृत्य को अखिल भारतीय सेवा आचरण नियमों (All India Services Conduct Rules) का उल्लंघन माना। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, “वकीलों के सामने उठक-बैठक करना एक अधिकारी के लिए अनुचित आचरण है, जो उनके पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है।” वीडियो वायरल होने के बाद जिला मजिस्ट्रेट (DM) से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई, जिसके आधार पर राही को पुवायां से हटाकर राजस्व परिषद, लखनऊ भेज दिया गया।

43 वर्षीय रिंकू सिंह राही का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। 2009 में, जब वे मुजफ्फरनगर में सामाजिक कल्याण अधिकारी के रूप में प्रांतीय सिविल सेवा (PCS) अधिकारी थे, उन्होंने सामाजिक कल्याण विभाग में 60-70 करोड़ रुपये के अनुपयोगी फंड की अनियमितताओं को उजागर किया था। इसके बाद उन पर हमला हुआ, जिसमें उन्हें छह गोलियां लगीं, जिससे उनकी एक आंख की रोशनी चली गई और चेहरा क्षतिग्रस्त हो गया। इसके बावजूद, उन्होंने 2023 में UPSC परीक्षा पास की और IAS अधिकारी बने।

राही ने इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा, “उठक-बैठक करना कोई मुद्दा नहीं है। असल चुनौती एक दलित होना है, जो मेरे लिए रोज़ का दंड है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका इरादा क्लर्क का अपमान करना नहीं था, बल्कि स्वच्छता और अनुशासन को बढ़ावा देना था।

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सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ यूजर्स ने राही को एक रोल मॉडल बताया, जिन्होंने अपनी गलती स्वीकार कर जवाबदेही दिखाई। एक यूजर ने X पर लिखा, “रिंकू सिंह राही ने जो किया, वह एक IAS की सच्ची जवाबदेही है।” वहीं, आलोचकों का कहना है कि इस कृत्य ने प्रशासनिक प्राधिकार को कमजोर किया और इसे दबाव में लिया गया कदम माना जाना चाहिए।

IAS अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई असामान्य नहीं है। उदाहरण के लिए, 2021 में छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिला कलेक्टर रणबीर शर्मा को एक युवक को थप्पड़ मारने के वायरल वीडियो के बाद हटा दिया गया था। इसी तरह, 2023 में पुणे की प्रशिक्षु IAS अधिकारी पूजा खेडकर को कथित रूप से शक्ति के दुरुपयोग और चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोपों के बाद जांच का सामना करना पड़ा। राही का मामला इस बात को रेखांकित करता है कि सार्वजनिक व्यवहार और आचरण IAS अधिकारियों के लिए कितना महत्वपूर्ण है।

राही का तबादला प्रशासनिक नियमों के तहत एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन यह घटना उनके करियर पर सवाल उठा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार का यह कदम अन्य अधिकारियों के लिए एक संदेश है कि सार्वजनिक दबाव में ऐसे कृत्य स्वीकार्य नहीं हैं। राही ने अपने बयान में कहा, “तबादला व्यवस्था का हिस्सा है। मैंने केवल समाज को जवाबदेही का संदेश देना चाहा।”

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