अतीक अहमद का 3000 करोड़ का साम्राज्य तबाह: माफिया का खौफनाक अंत
प्रयागराज, 12 अप्रैल 2025: कभी प्रयागराज की गलियों में खौफ का पर्याय रहे माफिया डॉन और पूर्व सांसद अतीक अहमद का 3000 करोड़ रुपये का साम्राज्य अब पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। चार दशकों तक अपराध और सियासत के गलियारों में एकछत्र राज करने वाले अतीक की कहानी का अंत न केवल उनके जीवन के साथ हुआ, बल्कि उनकी संपत्तियों और प्रभाव का भी सफाया हो गया। प्रयागराज में उनका पुश्तैनी घर, जो कभी उनके रुतबे का प्रतीक था, आज खंडहर में तब्दील है।
अतीक अहमद ने 1970 के दशक में छोटे-मोटे अपराधों से अपनी शुरुआत की थी। चकिया की गलियों से निकलकर उन्होंने हत्या, फिरौती, उगाही और जमीनों पर कब्जे का ऐसा जाल बुना कि उनका नाम प्रयागराज ही नहीं, पूरे उत्तर प्रदेश में दहशत का पर्याय बन गया। 1989 में राजनीति में कदम रखने के बाद उन्होंने इलाहाबाद पश्चिम सीट पर लगातार जीत हासिल की और 2004 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर फूलपुर से लोकसभा सांसद बने। सूत्रों के अनुसार, उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा अवैध निर्माण, रियल एस्टेट, ठेकेदारी और वक्फ बोर्ड की जमीनों पर कब्जे से आया। उनकी संपत्तियों में दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, पुणे और विदेशों में निवेश की भी खबरें थीं। 2017 में उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार के सत्ता में आने के बाद अतीक और उनके सहयोगियों के खिलाफ कार्रवाई तेज हो गई। प्रयागराज डेवलपमेंट अथॉरिटी (PDA) और पुलिस ने उनकी अवैध संपत्तियों को निशाना बनाया। सितंबर 2020 में चकिया में उनका पुश्तैनी घर, जो कथित तौर पर अवैध रूप से बनाया गया था, बुलडोजर से ढहा दिया गया। इसके बाद करबाला, सुल्तानपुर भावा, खुल्दाबाद और बेली में उनकी अन्य संपत्तियां भी ध्वस्त की गईं।
2023 में उमेश पाल हत्याकांड के बाद अतीक के खिलाफ कार्रवाई और तेज हुई। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उनकी 50 से ज्यादा शेल कंपनियों का पर्दाफाश किया, जो काले धन को सफेद करने में इस्तेमाल होती थीं। पुलिस और प्रशासन ने उनकी 1400 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्तियों को जब्त या ध्वस्त किया, जिसमें 750 करोड़ की संपत्तियां बुलडोजर से ढहाई गईं और 417 करोड़ की संपत्तियां जब्त की गईं। हाल ही में वक्फ बोर्ड की 71 करोड़ रुपये की जमीन पर उनके कब्जे का खुलासा हुआ, जिसमें से 50 करोड़ की संपत्ति बेची जा चुकी थी। चकिया में अतीक का पुश्तैनी घर कभी उनकी ताकत का प्रतीक था। दो बीघा में फैला यह दो मंजिला बंगला उनके परिवार का गढ़ था। लेकिन 2020 में PDA ने इसे अवैध निर्माण करार देकर ढहा दिया। इसके बाद 2023 में उनकी पत्नी शाइस्ता परवीन और बेटों के रहने वाले एक अन्य मकान को भी जमींदोज कर दिया गया। आज चकिया की गलियां, जो कभी अतीक के खौफ से कांपती थीं, एक अजीब सी खामोशी में डूबी हैं।
उमेश पाल हत्याकांड (24 फरवरी 2023) ने अतीक के पतन को और तेज कर दिया। इस मामले में अतीक, उनके भाई अशरफ, पत्नी शाइस्ता और बेटों को आरोपी बनाया गया। 13 अप्रैल 2023 को अतीक का बेटा असद पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। दो दिन बाद, 15 अप्रैल 2023 को अतीक और अशरफ को प्रयागराज में मेडिकल चेकअप के लिए ले जाते समय तीन हमलावरों ने गोली मार दी। अतीक के पांच बेटों में से दो जेल में हैं, दो नाबालिग बाल सुधार गृह में हैं, और शाइस्ता फरार है। उनके रिश्तेदार और सहयोगी भी या तो जेल में हैं या छिपे हुए हैं।हाल ही में खुलासा हुआ कि अतीक और उनके सहयोगियों ने प्रयागराज में वक्फ बोर्ड की 71 करोड़ रुपये की संपत्ति पर कब्जा किया था। जीटी रोड पर 30 करोड़ की जमीन पर बने मल्टी-स्टोरी भवनों से लेकर दुकानों और मकानों तक, अतीक का नेटवर्क वक्फ की जमीनों को हड़पने में जुटा था। प्रशासन ने इनमें से कुछ संपत्तियों को ध्वस्त करना शुरू कर दिया है, और जांच अभी भी जारी है।
प्रयागराज के लोग, जो कभी अतीक के नाम से सहम जाते थे, अब राहत की सांस ले रहे हैं। स्थानीय निवासी रमेश पाल कहते हैं, “अतीक के समय में कोई उसकी गाड़ी को ओवरटेक करने की हिम्मत नहीं करता था। आज उसका नाम लेने वाला कोई नहीं है।” हालांकि, कुछ लोग यह भी कहते हैं कि अतीक का साम्राज्य भले ही ढह गया हो, लेकिन उनके जैसे अपराधी समाज में फिर उभर सकते हैं, अगर सख्ती कम हुई। अतीक की कहानी एक ऐसे शख्स की है, जिसने अपराध की दुनिया से सियासत तक का सफर तय किया, लेकिन उसका अंत उतना ही खौफनाक था, जितना उसका राज। उनकी संपत्तियों का ढहना और परिवार का बिखराव एक सबक है कि अपराध का रास्ता आखिरकार विनाश की ओर ले जाता है।