विश्व मृदा दिवस पर कार्यशाला का हुआ आयोजन
बून्दी, 5 दिसम्बर। कृषि विज्ञान केन्द्र पर मंगलवार को कार्यालय अधीक्षण अभियन्ता एवं परियोजना प्रबन्धक, वाटरशेड कम डाटा सेंटर, जिला परिषद व केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में ‘‘विश्व मृदा दिवस’’ का आयोजन किया गया। जिसमें 69 प्रगतिशील कृषकों एवं कृषक महिलाओं ने भाग लिया।
मुख्य वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष प्रो. हरीश वर्मा ने विश्व मृदा दिवस आयोजन के महत्व पर चर्चा करते हुए बताया कि अविवेकपूर्ण तरीके से उर्वरकों का प्रयोग करने से मृदा का स्वास्थ्य दिनों दिन खराब होता जा रहा है। अतः विवेकपूर्ण एवं संतुलित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग करने के लिए मृदा नमूनों की जांच करवाकर ही आवश्यक पोषक तत्वों की पूर्ति मृदा स्वास्थ्य कार्ड के अनुसार की जाए एवं दो-तीन वर्ष में एक बार खेत में जैविक खाद की आपूर्ति के लिए नाडेप कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट, सुपर कम्पोस्ट के उपयोग करने की सलाह दी। मृदा प्रबंधन में गर्मियों की जुताई की उपयोगिता एवं कीट प्रबंधन की विभिन्न तकनीकों की जानकारी दी।
अधीक्षण अभियन्ता एवं परियोजना प्रबन्धक वाटरशेड कम डाटा सेंटर थानमल नागर ने विभाग द्वारा बूंदी जिले में किये जा रहे जल एवं मृदा संरक्षण संबंधित कार्यों की जानकारी देने के साथ ही भूमि कटाव एवं बचाव की विभिन्न तकनीकों के बारे में बताया।
कृषि अनुसंधान अधिकारी, मृदा परीक्षण प्रयोगशाला जितेन्द्र चौधरी ने पौधों के आवश्यक पोषक तत्वों, मृदा नमूना की उपयोगिता एवं मृदा नमूना लेने की जानकारी के बारे में बताया। पौधों में मुख्य एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों की भूमिका, कमी के लक्षण एवं उनके निदान के बारे में किसानों को जानकारी दी। साथ ही मृदा स्वास्थ्य कार्ड के महत्व के बारे में किसानों को अवगत कराया। लवणीय एवं क्षारीय मृदा सुधार के तरीके, नैनो उर्वरक का रबी फसलों में समुचित उपयोग एवं संतुलित प्रबंधन के बारे में जानकारी दी।
सह आचार्य पशुपालन डॉ घनश्याम मीणा ने मृदा को स्वस्थ रखने के उपाय के बारे में बताते हुए प्राकृतिक खेती पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में कनिष्ठ अभियन्ता अदिति मीणा, कनिष्ठ अभियन्ता रेणु मीणा, फार्म मेनेजर महेन्द्र चौधरी, दीपक कुमार, लोकेश प्रजापत एवं रामप्रसाद ने सहयोग किया। कार्यक्रम के अन्त में उद्यान वैज्ञानिक इंदिरा यादव ने सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया।