महज शिष्टाचार मुलाकात या राजनीति की बात ?
लखनऊ संवाददाता, संन्यासी का वेश। गेरुवा बाना। हिदुत्व की अलख। सनातन का जय घोष। कभी गुजरात, कभी कर्नाटक, कभी उत्तराखंड तो कभी लखनऊ। इन्हीं यात्राओं के बीच प्रणाम यात्रा। युवा संवाद। शिष्टाचार मुलाकात जैसे सैकड़ों कार्यक्रम। डिग्मबर बाबा की परती के लिए धरना, प्रदर्शन। विभिन्न प्रकार के आयोजनों में अतिथि संबोधन। जनता से सीधा संवाद… आदि आदि। क्या ये महज शिष्टाचार मुलाकातें हैं? कतई नहीं। इन सबके पीछे एक मकसद है। सलेमपुर लोक सभा क्षेत्र से प्रतिनिधित्व करके इसे संवारना और राष्ट्रीय क्षितिज पर इस क्षेत्र को चमकाते हुए राजनीति में खुद को स्थापित करना।
आज कल शांभवी पीठाधीश्वर स्वामी आनंद स्वरूप इसी में दिन रात लगे हैं। परदे के पीछे राष्ट्रवादी संगठन का हाथ है। गुजरात गए तो वहां के गृह मंत्री हर्ष सांघवी से मिल लिए। लखनऊ गए तो भाजपा के पूर्वांचल में अच्छी पकड़ रखने वाले त्र्यंबक त्रिपाठी से मिल लिए। आज यूपी के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक से मिल लिए। ये सब मिलन अनायास नहीं है। इस हेतु को आम जनता से पहले, सलेमपुर के राजनीतिक प्लेटफार्म पर उतरने वाले हर नेता समझने लगे हैं।