वर्ल्ड ट्रांसप्लांट गेम्स 2023 मे रजत पदक जीतने वाले भवानी सिंह शेखावत का जयपुर में हुआ स्वागत

जयपुर | भवानी सिंह शेखावत ने ऑस्ट्रेलिया के पर्थ शहर में चल रहे 13वें वर्ल्ड ट्रांसप्लांट गेम्स-2023 में रजत पदक जीत कर राजस्थान व देश का नाम रोशन किया है। उन्होंने पेंटांक व्यक्तिगत स्पर्धा में रजत पदक हासिल किया है। जिला संह-सयोजक खेल प्रकोष्ठ भाजपा जयपुर शहर व कार्यवाहक सचिव जयपुर जिला एथलेटिक संघ बिरेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि लक्ष्मण सिंह जी चौहान जिला मंत्री व जयपुर जिला बॉक्सिंग संघ के अध्यक्ष, खेल प्रकोष्ठ जिला कार्यकारिणी सदस्य गोपाल जी शर्मा , शेर सिंह जादू, शशांक शर्मा (आर्चरी खिलाडी) व शैलेश जी शेखावत (समाज सेवी) ने ओलंपियन कैप्टन श्री श्रीराम सिंह जी शेखावत पद्मश्री, अर्जुन अवॉर्डी, विशिष्ट सेवा मेडल, एशियन गेम्स गोल्ड मेडलिस्ट व राजस्थान के भाजपा प्रदेश मंत्री श्री श्रवण सिंह जी बगडी के द्वारा उनके वैशाली नगर ऑफिस मे ऑस्टर्लिया के पर्थ शहर में आयोजित वर्ल्ड ट्रांसप्लांट गेम्स 2023 मे रजत पदक जीतने वाले भवानी सिंह शेखावत का माला, साफा व मूमेंटो देकर उनका जोरदार स्वागत किया गया तथा श्रीराम सिंह जी शेखावत व श्री श्रवण सिंह जी बगडी के खेल प्रकोष्ठ की टीम ने आशीर्वाद लिया और भविष्य मे खेल प्रकोष्ठ की टीम के कार्यक्रम के बारे मे उनके साथ विचार विमर्श किया

भवानी सिंह वर्ल्ड ट्रांसप्लांट गेम्स में राजस्थान राज्य से पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी भी बन गए है। खेलों की 4 श्रेणियों में भवानीसिंह भाग ले रहे है, जिसमे से पहली ही श्रेणी में रजत पदक हासिल कर लिया। आस्ट्रेलिया के पर्थ शहर में आयोजित 13 वर्ल्ड ट्रांसप्लांट गेम्स में दुनिया के 70 से ज्यादा देशों के 3500 से ज्यादा खिलाड़ी भाग ले रहे हैं। भारत की तरफ से 31 खिलाड़ी इन खेलों में विभिन्न प्रतिस्पर्धा में हिस्सा ले रहे है। वर्ल्ड ट्रांसप्लांट गेम्स 1974 से लगातार प्रति दो वर्षों से आयोजित हो रहे है, जिनका आयोजन अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक कमेटी के सहयोग से वर्ल्ड ट्रांसप्लांट गेम्स फेडरेशन द्वारा करवाया जाता है।

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जिले के नवलगढ़ क्षेत्र की जाखल सीएचसी में नर्सिंग ऑफिसर के पद पर कार्यरत भवानीसिंह शेखावत का 19 वर्ष की उम्र में किडनी ट्रांसप्लांट हो चुका है। भवानीसिंह के पैर में इंफेक्शन हो गया था। इलाज के दौरान गलत इंजेक्शन के कारण दोनों गुर्दे खराब हो गए थे। उनके पिता घनश्यामसिंह ने वर्ष 2004 में अपना एक गुर्दा दान कर भवानीसिंह का जीवन बचाया।

 

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