कोविड काल मे स्कूल में ठहरे व्यक्ति का दस माह बाद मिला कंकाल
- प्रशासन व स्कूल प्रबंधन की लापरवाही से कोरोनटाईन सेंटर में ही तोड़ दिया था दम
- दस माह बाद जब बुधवार को खुला स्कूल तो मामला हुआ उजागर
वाराणसी। कोविड 19 के दौरान कौन कहाँ मरा लोगों को पता भी नहीं चला। बड़े शहरों से पलायन कर अपने गावों को लौट रहे लोगों को पकड़ पकड़ कर शेल्टर होम में रखा जाता था। ज्यादातर स्कूल ही शेल्टर होम बने थे। प्रशासन और स्कूल प्रबंधन की लापरवाही का एक उदाहरण तब सामने आया जब वाराणसी में स्कूल खुलने पर एक कमरे में एक कंकाल मिला। चारों तरफ हड़कम्प मच गया।
यूपी में बुधवार से जूनियर स्कूलों को भी खोल दिया गया। वाराणसी में भी लगभग सभी स्कूल खुल गए। कुछ स्कूलों में बच्चे भी पहुंचे तो कुछ स्कूलों में साफ सफाई शुरू कराई गई। इसी दौरान कचहरी पर स्थित जेपी मेहता इंटर कॉलेज को खोलने के बाद सफाई के दौरान एक क्लास रूम में कंकाल मिलने से हड़कंप मच गया। स्कूल प्रबंधन की सूचना पर पुलिस और फोरेंसिक विभाग की टीम मौके पर पहुंच कर जांच कर रही है।

फिलहाल यह तय नहीं हो पाया है कि कंकाल पुरुष का है या महिला का। यह बात पक्की है कि शेल्टर होम में निगरानी के अभाव में किसी की जान चली गयी और न तो प्रशासन को खबर मिली न स्कूल प्रबंधन को।जेपी मेहता इंटर कालेज को कोरोना काल में बेघरों के लिए सेल्टर होम बनाया गया था। यहां पर शहर में भीख मांगने वालों और ऐसे लोगों को रखा गया था जिनका कोई ठिकाना नहीं है। रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन और सार्वजनिक स्थानों पर सड़क किनारे पड़े रहने वाले लोगों को यहां लाकर रखा गया था। इनमें ज्यादातर ऐसे लोग भी थे जो पहले से बीमार थे।माना जा रहा है कि लॉकडाउन खुलने के बाद धीरे-धीरे यहां रखे गए बेघर एक-एक कर कहीं चले गए। बीमारी की हालत में कोई महिला या पुरुष क्लास रूम में रह गया। कमरा बंद करने वाले ने ध्यान नहीं दिया और बीमारी की हालत में उसकी मौत हो गई। कंकाल देखने से लग रहा है कि कोरोना काल के दौरान ही मौत हो चुकी थी। स्कूल के सभी क्लास बंद रहने से किसी को इसकी जानकारी नहीं हो सकी। स्कूल खुलने के आदेश के बाद बुधवार को सफाई की शुरुआत हुई थी, तब मजदूरों ने कंकाल देखा। प्रधानाचार्य डॉ एनके सिंह ने कैंट पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस के साथ फोरेंसिक विभाग की टीम भी पहुंची और जांच पड़ताल में जुट गई है।