सरयूपारीण ब्राह्मण समाज ने देसी मांझे से पतंग उड़ाकर मनाया मकर संक्रांति
संक्रांति प्रतीक है परिवर्तन का, सामाजिक समरसता का, एकता व बंधुत्व का। तिल गुणवान हैं परंतु गुड़ के बिना बेस्वाद, जिनको खाया नहीं जा सकता। घी डलते ही खिचड़ी की गुणवत्ता दोगुनी हो जाती है।
सरयूपारीण ब्राह्मण समाज, राजस्थान की ओर से अध्यक्ष बलराम मिश्रा और महासचिव ओमप्रकाश त्रिपाठी की अध्यक्षता में गुरुवार को मकर संक्रांति पर्व धूमधाम से मनाया गया। संगठन सचिव ए के पाण्डेय ने बताया कि सरयूपारीण ब्राह्मण समाज ने मकर संक्रांति पर्व पर चाइनीज डोर का पूरी तरह से विरोध करते हुए भारतीय मांझे से पतंगबाजी करने का निर्णय लिया। साथ ही समूह सदस्यगणों की ओर से राकड़ी में एकजुट होकर पतंग उड़ाकर तथा तिल के लड्डू खिलाकर सभी की सुख-समृद्धि की कामना की गई। अध्यक्ष बलराम मिश्रा ने कहा कि संक्रांति प्रतीक है परिवर्तन का, सामाजिक समरसता का, एकता व बंधुत्व का। तिल गुणवान हैं परंतु गुड़ के बिना बेस्वाद, जिनको खाया नहीं जा सकता। घी डलते ही खिचड़ी की गुणवत्ता दोगुनी हो जाती है। गुड़ के बिना तिल का महत्त्व नहीं और घी के बिना खिचड़ी अधूरी, समाज में दूसरे के बिना मैं अधूरा, इसी तरह मैं भी किसी का पूरक। एक-दूसरे का महत्त्व समझते हुए समाज में समरस हो कर रहना संदेश है मकर संक्रांति का। इस अवसर कोषाध्यक्ष पंडित जय नारायण शुक्ल ने बताया कि मकर संक्रांति में ‘मकर’ शब्द मकर राशि को इंगित करता है जबकि ‘संक्रांति’ का अर्थ संक्रमण अर्थात प्रवेश करना है। मकर संक्रांति के दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है। एक राशि को छोड़कर दूसरे में प्रवेश करने की इस विस्थापन क्रिया को संक्रांति कहते हैं। चूंकि सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है इसलिए इस समय को मकर संक्रांति कहा जाता है। भारीतय पंचांग के महीने के अनुसार पौष शुक्ल पक्ष में मकर संक्रांति पर्व मनाया जाता है। जैसे चन्द्रमास के 2 भाग हैं- कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष। इसी तरह सौरवर्ष के आधार पर वर्ष के 2 भाग हैं- उत्तरायन और दक्षिणायन। इस दिन से सूर्य उत्तरायन हो जाता है। उत्तरायन अर्थात उस समय से धरती का उत्तरी गोलार्ध सूर्य की ओर मुड़ जाता है, तो उत्तर ही से सूर्य निकलने लगता है। 6 माह सूर्य उत्तरायन रहता है और 6 माह दक्षिणायन। अत: यह पर्व ‘उत्तरायन’ के नाम से भी जाना जाता है। इस अवसर पर उपाध्क्ष सुरेन्द्र प्रसाद मिश्रा, संयुक्त सचिव सुरेन्द्र चौबे, सौरभ जी, सोनी एस्किलेटर्स के प्रभाकर दुबे, विनायक नर्सरी के विजय पाण्डेय, राकेश पाठक, केशव शुक्ला, शेषनाथ तिवारी, राजीव तिवारी, सुनील तिवारी , एम के निल्को आदि मौजूद थे।