पाली : सेवा ही संस्कार है और सेवा का सम्मान जरूरी – गोडवाड़ चेरिटेबल ट्रस्ट

प्रभु सिंह, पाली | हमारे संस्कार और संस्कृति ने हमेशा देश सेवा में लगे लोगों का सम्मान करना सिखाया है। यही संदेश देते हुये गोडवाड़ चेरिटेबल ट्रस्ट ने कोरोना महामारी के दौरान अपनी जान जोखिम मे डालकर कोविड 19 के मरीजों की सेवा कर रहें बाली चिकित्सालय के कर्मचारीयों को  सम्मानित किया उन सभी का बाली किले की तस्वीर भेट कर और पुष्प की  माला पहनाकर उनको सम्मानित किया गया जिसमे केवलचंन्द गोयल, जीतेन्द्र कुमार मालवीय, भॅवर सिंह चौहान, सजेंद्र सिंह सोढा, जीतेन्द्र सिंह मेडतिया, निखिल जोशी, तथा मनोहर सिंह देवड़ा सहित दर्जनों लोगों को सम्मानित किया गया।

आइये जानते है क्या है गोडवाड़ –

गोड़वाड़ भारत के राजस्थान राज्य पाली जिले का मेवाड का सीमावर्ती एक क्षेत्रीय इलाका है। हर साल यहाँ गोडवाड़ महोत्स्व मनाया जाता है। यह क्षेत्र अरावली और मेवाड़ की तराई में है। इसका विस्तार अरावली पर्वत से दक्षिण पूर्व में मेवाड़ तथा दक्षिण पश्चिम में जालौर और सिरोही तक है। यहाँ के हर छोटे बड़े गावो में हवेली गढ़ मौजूद है जिनमे मुख्य है घाणेराव,बेडा,वरकाणा,फालना,चाणौद,आउवा,नारलाई आदि के रावले गढ़ व् देसूरी किला अन्य में नाडोल,बोया,सिन्दरली,कोटड़ी,बीजापुर,आदि के गढ़ और पुरानी हवेलिया। भाटुन्द गाँव ब्राहमणो की सदियों पुरानी नगरी है। यहाँ पर हर साल माँ शीतला माता का विशाल मेला लगता है। यहाँ पर देव मन्दिर अधिक होने के कारण इसे देव नगरी भी कहते हैं। ब्राहमणो की नगरी होने के कारण इसे ब्रह्म नगरी भी कहते हैं। १०वी व ११ वी सदी का सूर्य मन्दिर है। यह महाराजा भोज ने बनाया था। यहाँ का तालाब बाली तहसील में सबसे बड़ा है, यह भी महाराजा भोज ने खुुदवाया था।

यहाँ प्राचीन समय से ही इतिहास में अपनी उपस्थिति दर्ज करता रहा है मेवाड़ आने का एक मार्ग देसूरी दर्रा भी था मेवाड़ के महाराणा ने इस क्षेत्र की और मार्ग की रक्षा का भार सोलंकी,मेड़तिया एवं रूपावत राठौड़ राजपूतो में दे रखा यहाँ था।  दिल्ली के बादशाह के जब इस दर्रे से आक्रमण किया तब बिक्रम सिंह सोलंकी और हिम्मत सिंह मेड़तिया के नेतृत्व में मुगलो को हराया इस सन्दर्भ में एक कहावत प्रसिद्ध है। बादशाह री पाग हिम्मत बिक्रम उतारी: यह क्षेत्र पहले मेवाड़ के कब्जे में था बाद में मेवाड़ मारवाड़ विवाह के दौरान में देहज के रूप में मारवाड़ को गया पर यहाँ के अधिकतर ठिकाने जोधपुर मारवाड़ के प्रति उदासीन रहे घाणेराव ठिकाने के ठाकुर को गोडवाड़ का राजा कहा जाता था और सरकार कह कर संबोदित किया जाता था।

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