केन्द्रीय मंत्री डॉ० निशंक की पुस्तक “हिमालय में विवेकानन्द” पर आधारित डॉक्यूमेंट्री का हुआ लोकार्पण
के के पाण्डेय, नैनीताल | दिनांक 8 अक्टूबर को कुमाऊं विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन में माननीय केन्द्रीय शिक्षा मंत्री, भारत सरकार डॉ० रमेश पोखरियाल निशंक की पुस्तक “हिमालय में विवेकानन्द” पर आधारित “उत्तराखंड में स्वामी विवेकानंद पर्यटन परिपथ” डॉक्यूमेंटरी फिल्म को लांच किया गया। इस डॉक्यूमेंटरी फिल्म का निर्माण कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल तथा हे०न०ब० गढवाल विश्वविद्यालय श्रीनगर द्वारा संयुक्त रूप से किया गया है। यह फिल्म भारत सरकार के “एक भारत श्रेष्ठ भारत” अभियान को समर्पित है। इस फिल्म को कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो० एन० के० जोशी एवं हे०न०ब० गढवाल विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो० अन्नपूर्णा नौटियाल द्वारा संयुक्त रूप से वेबनार के माध्यम से 11:30 बजे कुमाऊं विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन में लांच किया गया।
ज्ञात हो कि स्वामी विवेकानन्द ने अपने जीवनकाल में उत्तराखण्ड की चार बार यात्रा की। स्वामी विवेकानन्द द्वारा अपने मित्रों को लिखे पत्रों, उनके साथ भारत आये उनके शिष्यों आदि के संस्मरणों से पता चलता है कि स्वामी विवेकानन्द को उत्तराखण्ड से विशेष लगाव था। उत्तराखंड में कोसी और सील नदियों के संगम पर स्थित छोटी सी घाटी में बसे काकड़ीघाट (अल्मोड़ा) नामक मनोरम एवं एकांत स्थल में स्वामी विवेकानन्द को आत्मज्ञान की अनुभूति हुई थी। इस स्थान को संत सोमवरी गिरी महाराज और हैड़ाखान बाबा की साधना स्थली भी माना जाता है। कहा जाता है कि अपनी उत्तराखंड यात्रा के दौरान स्वामी विवेकानंद ने जहां-जहां साधना की, वहां आज भी अद्भुत ऊर्जा महसूस की जा सकती है।
इस अवसर पर कुलपति प्रो० एन० के० जोशी ने कहा कि विवेकानंद जी ‘मनुष्यों के निर्माण में विश्वास‘ रखते थे। इससे उनका आशय था शिक्षा के जरिए विद्यार्थियों में सनातन मूल्यों के प्रति आस्था पैदा करना। ये मूल्य एक मजबूत चरित्र वाले नागरिक और एक अच्छे मनुष्य की नींव बनते हैं। ऐसा व्यक्ति अपनी और अपने देश की मुक्ति के लिए संघर्ष करता है। विवेकानंद की मान्यता थी कि शिक्षा, मनुष्य में आत्मनिर्भरता और वैश्विक बंधुत्व को बढ़ावा देने का जरिया होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड सदियों से साधकों की तपस्थली रहा है। हिमालय के सुदूर अंचल में ऋषि विद्वानों को आज भी तपस्यारत देखा जा सकता है। स्वामी विवेकानंद को भी इस पहाड़ी अंचल से बेहद लगाव था। फिर चाहे वो देहरादून हो या अल्मोड़ा। उन्होंने अपने जीवन के कई दिन यहां ना केवल गुजारे, बल्कि इस जगह को अपना साधनास्थल भी बनाया।

कुलपति प्रो० जोशी ने “एक भारत श्रेष्ठ भारत” क्लब के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि आगे भी दोनों विश्वविद्यालय मिलकर इस प्रकार के प्रयास करते रहेंगे। इस डॉक्यूमेंटरी फिल्म के बनने से उत्तराखंड आने वाले पर्यटकों को विवेकानंद जी की यात्रा की पूरी जानकारी मिल पायेगी साथ ही पर्यटकों के बढने से स्थानीय लोगों को भी रोजगार मिलेगा। कुमाऊं विश्वविद्यालय “स्वामी विवेकानंद पीठ” के माध्यम से स्वामी जी के विचार-दर्शन पर शोध कार्य करेगा जिससे कि युवा वर्ग प्रेरणा प्राप्त कर अपने को राष्ट्रहित हेतु समर्पित कर सके।
इस अवसर पर हे०न०ब० गढवाल विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो० अन्नपूर्णा नौटियाल ने कहा कि भारतीय अध्यात्म और संस्कृति को विश्व में अभूतपूर्व पहचान दिलाने का सबसे बड़ा श्रेय अगर किसी को जाता है तो वह हैं स्वामी विवेकानंद। युगपुरुष स्वामी विवेकानंद का उत्तराखंड से गहरा नाता रहा है। प्रकृति की शांत वादियां और हिमालय की आध्यात्मिक शक्ति उन्हें कुमाऊं उन्हें कुमाऊं खींच लाई थी। स्वामी जी का मत था कि हिमालय की ओर बढ़ता मानव मन स्वत: ही आध्यात्म में डूब जाता है। यही वजह रही कि वे चाहते थे हिमालय की शांति व निर्जनता में एक ऐसा मठ स्थापित हो जहां अद्वैत की शिक्षा व साधना दोनों हो सके।
विशिष्ट वक्ता खाद्य आयुक्त, उत्तराखंड डॉ० सुचिश्मिता देश पाण्डे ने दोनों विश्वविद्यालय के कुलपतियों को बधाई देते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद के जीवन दर्शन एवं उनके पर्यटन पथ पर आधारित वृत्तचित्र बनाने का यह अभूतपूर्व प्रयास देश में प्रथम है। निसंदेह यह प्रयोग युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत का कार्य करेगा।
विवेकानंद पीठ के सचिव एवं “एक भारत श्रेष्ठ भारत क्लब” के संयोजक प्रो० अतुल जोशी ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद जी ने अपने संबोधन में कहा था कि इन पहाड़ों के साथ हमारी श्रेष्ठतम स्मृतियां जुड़ी हुई हैं। यदि धार्मिक भारत के इतिहास से हिमालय को निकाल दिया जाए तो उसका कुछ भी बचा नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद की भाँति ही दोनों विश्वविद्यालय द्वारा सामूहिक रूप में गुरूदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर एवं महात्मा गांधी की उत्तराखंड यात्राओं पर आधारित डॉक्यूमेंटरी फिल्म का भी निर्माण किया जायेगा। उन्होंने बताया कि डॉक्यूमेंटरी फिल्म का निर्माण डॉ० सर्वेश उनियाल के निर्देशन में पर्यटन विभाग, हे०न०ब० गढवाल विश्वविद्यालय द्वारा किया गया है।
इस अवसर पर आयोजित वेबनार में प्रो० एस० सी० बागडी, प्रो० ओ० पी० बेलवाल, प्रो० एस० के० गुप्ता, प्रो० गिरीश रंजन तिवारी, डॉ० सर्वेश उनियाल, श्री विधान चौधरी, श्री के० के० पाण्डे, श्री मनोज पाण्डे सहित दोनों विश्वविद्यालयों के प्राध्यापक एवं कर्मचारी उपस्थित रहें।