हनुमान बेनीवाल का किरोड़ीलाल मीणा पर सनसनीखेज हमला: ब्लैकमेलिंग और भ्रष्टाचार का आरोप, 200 करोड़ की डील का दावा

जयपुर: राजस्थान की राजनीति में एक नया विवाद तब खड़ा हो गया, जब राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के सांसद हनुमान बेनीवाल ने राज्य के कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा पर गंभीर आरोप लगाए। बेनीवाल ने दावा किया कि मीणा का मुख्य “धंधा” लोगों को डराने-धमकाने और ब्लैकमेल करने का है। उन्होंने 2013 में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ मीणा की कथित 200 करोड़ रुपये की डील का जिक्र किया, जिसके बाद “हेलिकॉप्टर उड़ाए गए।” हनुमान बेनीवाल ने एक टीवी डिबेट के दौरान किरोड़ीलाल मीणा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि मीणा आंदोलन शुरू करते हैं, लेकिन बाद में ब्लैकमेलिंग के जरिए अपने निजी हित साधते हैं। बेनीवाल ने डिपार्टमेंट ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (DOIT) में सोने के बिस्किट घोटाले में मीणा पर 5 करोड़ रुपये लेने का दावा किया। इसके अलावा, हवामहल विधानसभा क्षेत्र में एक युवक की मौत के मामले में मीणा पर पूर्व मंत्री महेश जोशी से 2 करोड़ रुपये लेने का आरोप लगाया, जो कथित तौर पर एक बीजेपी नेता के माध्यम से दिलवाए गए। बेनीवाल ने मीणा को “चोर और लुटेरा” तक कह डाला, जिससे सियासी माहौल गरमा गया।

किरोड़ीलाल मीणा ने इन आरोपों का जवाब देते हुए अपनी छवि को जनहित के लिए लड़ने वाले नेता के रूप में पेश किया। उन्होंने कहा, “कांग्रेस के शासन में जब कोई सड़क पर नहीं उतरा, तब मैंने जनता के लिए आवाज उठाई।” मीणा ने दावा किया कि उन्होंने किसानों को नकली खाद और कीटनाशक बेचने वाले 57 बड़े व्यापारियों के खिलाफ कार्रवाई की, जो उनकी निष्पक्षता को दर्शाता है। उन्होंने बेनीवाल के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि वह हमेशा जनता के हित में काम करते हैं। बेनीवाल और मीणा का इतिहास पुराना है। दोनों पहले एक साथ आंदोलनों में हिस्सा लेते थे, लेकिन 2015 में मीणा के बीजेपी में शामिल होने के बाद उनके रास्ते अलग हो गए। बेनीवाल ने हाल ही में कहा कि मीणा का बीजेपी में “दम घुट रहा है” और उन्हें पार्टी छोड़ देनी चाहिए। हालांकि, कुछ मौकों पर बेनीवाल ने मीणा का समर्थन भी किया, जैसे कि दिसंबर 2024 में एसआई भर्ती परीक्षा रद्द करने की मांग को लेकर। हनुमान बेनीवाल और किरोड़ीलाल मीणा के बीच यह जुबानी जंग राजस्थान की राजनीति में नए समीकरण बना सकती है। बेनीवाल के आरोपों ने बीजेपी और कांग्रेस दोनों को कटघरे में खड़ा किया है, जबकि मीणा अपनी छवि को जनता के हित में काम करने वाले नेता के रूप में बचाने की कोशिश कर रहे हैं। यह विवाद बीजेपी के आंतरिक समीकरणों पर भी असर डाल सकता है, क्योंकि मीणा पार्टी के दिग्गज नेताओं में से एक हैं।

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