अब सहन नहीं होता…लिखकर जवान ने खुद को मारी गोली

  • गोरखपुर, उत्तर प्रदेश | संवाददाता: अनिल कुमार शर्मा | 8 अगस्त 2025

गोरखपुर एयरपोर्ट के रनवे पर गुरुवार तड़के एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। डिफेंस सिक्योरिटी कॉर्प्स (DSC) के जवान जितेंद्र सिंह ने अपनी सर्विस राइफल AK-103 से खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। पुलिस को शव के पास से एक सुसाइड नोट मिला, जिसमें जवान ने लिखा, “मैं अपने भाइयों से तंग आ चुका हूं। फर्जी केस ने जीना मुश्किल कर दिया है। अब बर्दाश्त नहीं होता। इस दर्द के साथ जीना कठिन हो रहा है। इसलिए जीवन को विराम दे रहा हूं।”

घटना सुबह करीब 4 बजे की है, जब जितेंद्र सिंह (49) गोरखपुर एयरपोर्ट के रनवे पर ड्यूटी पर तैनात थे। वह बिहार के छपरा जिले के तारा आमनोर, थाना मकेर के निवासी थे। भारतीय सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद वह DSC में सुरक्षाकर्मी के रूप में कार्यरत थे और गोरखपुर के झरना टोला में किराए के मकान में रहते थे। गुरुवार सुबह, ड्यूटी के दौरान उन्होंने अचानक अपनी राइफल से पेट में गोली मार ली। गोली की आवाज सुनकर अन्य सुरक्षाकर्मी और अधिकारी मौके पर पहुंचे, जहां जितेंद्र का शव खून से लथपथ पड़ा मिला।

पुलिस को मिले सुसाइड नोट के अनुसार, जितेंद्र अपने भाइयों के साथ चल रहे पारिवारिक विवाद और फर्जी केस से मानसिक रूप से परेशान थे। नोट में उन्होंने अपनी पीड़ा का जिक्र करते हुए कहा कि वह इस दर्द को और सहन नहीं कर सकते। CO कैंट योगेंद्र सिंह ने बताया कि जितेंद्र दो अन्य साथियों के साथ रनवे पर ड्यूटी पर थे। उनके साथी स्टॉप रूम में थे, जहां कूलर की तेज आवाज के कारण गोली की आवाज सुनाई नहीं दी। रिलीवर जवान जब ड्यूटी पर पहुंचा, तब उसे जितेंद्र का शव दिखा।

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घटना की सूचना मिलते ही एम्स थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। पुलिस ने परिवार वालों को सूचना दे दी है और मामले की गहन जांच शुरू कर दी है। सीसीटीवी फुटेज की भी जांच की जा रही है ताकि घटना का सटीक समय और परिस्थितियां स्पष्ट हो सकें। पुलिस का कहना है कि परिवार के आने के बाद और जानकारी मिल सकती है।

जितेंद्र सिंह चार भाइयों में तीसरे नंबर पर थे। उनके परिवार में पत्नी, दो बेटियां और एक बेटा है, जो वर्तमान में उनके पैतृक गांव में हैं। जितेंद्र 3 अगस्त को गोरखपुर लौटे थे, जबकि उनका परिवार गांव में ही रुका था। घटना की खबर मिलते ही उनके गांव तारा आमनोर में मातम छा गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

इस घटना ने एक बार फिर पारिवारिक तनाव और मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों पर ध्यान आकर्षित किया है। जितेंद्र के साथियों ने उन्हें शांत और अनुशासित स्वभाव का बताया, जिसके कारण उनकी मानसिक पीड़ा का अंदाजा कोई नहीं लगा सका। गांव वालों ने भी आत्महत्या पर सवाल उठाए हैं, उनका कहना है कि जितेंद्र ऐसा कदम नहीं उठा सकते थे।

एयरपोर्ट प्रशासन ने तत्काल पुलिस को सूचना दी और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी है। इस घटना ने अति सुरक्षित क्षेत्र में तैनात जवानों के मानसिक स्वास्थ्य पर सवाल उठाए हैं। पुलिस और प्रशासन इस मामले को गंभीरता से ले रहा है और यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा रहा है कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।

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