भारत ने अमेरिका से हथियार-विमानों की खरीद पर अस्थायी रूप से रोक
- नई दिल्ली | संवाददाता: देवेंद्र पुरोहित | 8 अगस्त 2025
भारत ने अमेरिका से हथियारों और विमानों की खरीद पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी है। यह निर्णय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा रूसी तेल खरीद को लेकर भारत पर 25% अतिरिक्त शुल्क लगाने के बाद लिया गया है। रॉयटर्स के अनुसार, तीन भारतीय अधिकारियों ने बताया कि नई दिल्ली ने इस कदम को द्विपक्षीय संबंधों में दबाव के रूप में देखा है, जिसके चलते रक्षा सौदों पर चर्चा को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। इस घटना ने भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग पर सवाल खड़े किए हैं, खासकर तब जब भारत रूस से अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है।
6 अगस्त 2025 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत के सामानों पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लागू किया, जिसके परिणामस्वरूप भारत के निर्यात पर कुल शुल्क 50% तक पहुंच गया है। ट्रम्प ने इसे रूस से तेल और सैन्य उपकरण खरीदने के लिए भारत को “सजा” बताया, क्योंकि उनका मानना है कि इससे रूस-यूक्रेन युद्ध को वित्तीय सहायता मिल रही है। इसके जवाब में भारत ने अमेरिका से स्ट्राइकर लड़ाकू वाहन, जैवेलिन एंटी-टैंक मिसाइल और छह बोइंग P-8I टोही विमान (लगभग 3.6 बिलियन डॉलर) की खरीद योजनाओं को स्थगित कर दिया। भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की प्रस्तावित अमेरिका यात्रा, जिसमें इन सौदों पर चर्चा होनी थी, भी रद्द कर दी गई है। इससे पहले, जुलाई 2025 में भारत ने अमेरिका को सूचित किया था कि वह F-35 स्टील्थ फाइटर जेट्स खरीदने में रुचि नहीं रखता। ब्लूमबर्ग के अनुसार, फरवरी 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वाशिंगटन यात्रा के दौरान ट्रम्प ने इन विमानों की बिक्री का प्रस्ताव रखा था। हालांकि, भारत ने स्वदेशी रक्षा कार्यक्रमों, जैसे एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA), और संयुक्त डिजाइन व विनिर्माण पर ध्यान देने की प्राथमिकता जताई। भारतीय अधिकारियों ने अमेरिकी टैरिफ की घोषणा पर “आघात और निराशा” जताई और कहा कि नए बड़े रक्षा सौदे निकट भविष्य में संभव नहीं हैं।
भारत, जो विश्व का सबसे बड़ा हथियार आयातक देश है, पिछले कुछ वर्षों से रूस पर अपनी निर्भरता कम कर रहा है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के अनुसार, 2020-2024 में रूस से भारत के हथियार आयात 36% थे, जो पिछले पांच साल की तुलना में 55% से कम है। रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण रूस की आपूर्ति क्षमता प्रभावित हुई है, जिसने भारत को फ्रांस, इजरायल और अमेरिका जैसे पश्चिमी देशों की ओर रुख करने के लिए प्रेरित किया। हालांकि, भारत का मुख्य लक्ष्य स्वदेशी रक्षा उद्योग को मजबूत करना है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि अगले दशक में भारत 100 बिलियन डॉलर से अधिक के हथियार घरेलू उद्योग से खरीदेगा। यह कदम भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग के लिए एक झटका है, जो 2016 में भारत को मेजर डिफेंस पार्टनर के रूप में नामित करने के बाद से बढ़ रहा था। 2008 में शून्य के करीब से 2020 तक दोनों देशों के बीच रक्षा व्यापार 20 बिलियन डॉलर से अधिक हो गया। हाल के वर्षों में भारत ने अमेरिका से MH-60R सीहॉक हेलीकॉप्टर, अपाचे हेलीकॉप्टर और MQ-9B सीगार्जियन ड्रोन जैसे उपकरण खरीदे हैं। हालांकि, अमेरिका की सख्त निर्यात नियंत्रण नीतियां और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पर प्रतिबंध भारत के लिए बाधा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत किसी एक देश पर निर्भर नहीं होना चाहता और फ्रांस, जर्मनी, स्पेन और इजरायल जैसे देशों के साथ भी रक्षा व्यापार बढ़ा रहा है।
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “रक्षा खरीद हमारे राष्ट्रीय हितों और सामरिक मूल्यांकन पर आधारित होती है।” रॉयटर्स के एक सूत्र के अनुसार, अमेरिका के साथ हथियार खरीद भविष्य में संभव है, लेकिन यह टैरिफ और द्विपक्षीय संबंधों पर स्पष्टता पर निर्भर करेगा। भारत ने संकेत दिया है कि वह रूस से तेल आयात कम करने और अमेरिका से ऊर्जा आयात बढ़ाने पर विचार कर सकता है, बशर्ते कीमतें समान हों। यह घटना भारत-अमेरिका संबंधों में एक महत्वपूर्ण मोड़ को दर्शाती है। भारत का यह कदम न केवल आर्थिक प्रतिशोध है, बल्कि उसकी संप्रभु निर्णय लेने की क्षमता पर जोर देता है। दूसरी ओर, अमेरिका के लिए भारत एक महत्वपूर्ण रक्षा बाजार है, और इस तनाव से रूस और अन्य देशों को लाभ हो सकता है। कुछ एक्स पोस्ट्स में दावा किया गया है कि भारत अब रूस से 50-60 Su-57 फाइटर जेट्स खरीद सकता है, लेकिन इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।