पति ने मजदूरी कर पत्नी को बनाया शिक्षिका, सरकारी नौकरी मिलते ही पत्नी ने कहा ‘आप कौन जी…?
- भरतपुर में पति ने मजदूरी कर पत्नी को बनाया टीचर
- सरकारी नौकरी मिलते ही पत्नी ने छोड़ा
- अनूप कुमार जाटव ने लगाई कलेक्टर से गुहार
भरतपुर जिले के भुसावर इलाके में एक अनोखा और दुखद मामला सामने आया है, जहां एक पति ने मजदूरी करके अपनी पत्नी को शिक्षिका बनाया, लेकिन सरकारी नौकरी मिलते ही पत्नी ने उसे छोड़ दिया और उसके साथ रहने से इंकार कर दिया। पीड़ित पति, अनूप कुमार जाटव, ने इस मामले को लेकर जिला कलक्टर और अपर जिला न्यायाधीश के समक्ष अपनी व्यथा रखी है।
अनूप कुमार जाटव, पुत्र मोतीलाल जाटव, ने जिला कलक्टर को दिए परिवाद में बताया कि वर्ष 2021 में उनका विवाह नगला हवेली निवासी एक युवती के साथ बिना दान-दहेज के साधारण तरीके से हुआ था। शादी के बाद अनूप ने कठिन परिश्रम और मजदूरी करके अपनी पत्नी की पढ़ाई-लिखाई का खर्च उठाया। कोचिंग और अन्य खर्चों का बोझ भी उन्होंने अकेले वहन किया। उनके प्रयासों का परिणाम यह हुआ कि वर्ष 2023 में उनकी पत्नी का चयन सरकारी शिक्षिका के रूप में हो गया।
हालांकि, सरकारी नौकरी मिलने के बाद पत्नी के व्यवहार में भारी बदलाव आ गया। अनूप के अनुसार, उनकी पत्नी ने उनके माता-पिता के साथ अभद्र व्यवहार शुरू कर दिया। वह अपने अच्छे वेतन और ट्यूशन से होने वाली अतिरिक्त आय के बावजूद घरेलू खर्चों में सहयोग करने से बचने लगी। स्थिति तब और बिगड़ गई जब 2 मई 2025 को पत्नी ने अनूप के साथ रहने से साफ इंकार कर दिया और पढ़ाई-लिखाई के लिए किए गए उनके योगदान को भी नकार दिया।
अनूप कुमार ने अपनी शिकायत को लेकर जिला कलक्टर और अपर जिला न्यायाधीश से न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी ने न केवल उन्हें छोड़ दिया, बल्कि उनके परिवार के प्रति भी असम्मानजनक रवैया अपनाया। यह मामला सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है, जहां लोग इस घटना को लेकर अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं। कुछ यूजर्स ने इसे महिलाओं के लिए सामान्यीकरण करने की कोशिश की है, लेकिन अन्य ने इसे एक व्यक्तिगत मामला मानते हुए सभी महिलाओं को इसके लिए जिम्मेदार ठहराने की आलोचना की है। सोशल मीडिया पर इस मामले ने व्यापक ध्यान खींचा है। एक यूजर ने लिखा, “पति ने मजदूरी करके पत्नी को पढ़ाया, लेकिन नौकरी मिलते ही पत्नी ने उसे पहचानने से इंकार कर दिया। बहनों, ऐसा मत करो, इससे पूरी महिला वर्ग पर प्रभाव पड़ता है।” वहीं, कुछ लोगों ने पत्नी के दावों का भी जिक्र किया, जिसमें उसने कहा कि उसका विवाह बाल विवाह था और उसे कुछ याद नहीं।
यह पहला ऐसा मामला नहीं है। इससे पहले भी उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में एक समान घटना सामने आई थी, जहां एक पति ने अपनी पत्नी को पढ़ाया-लिखाया, लेकिन सरकारी नौकरी मिलने के बाद पत्नी ने उसे छोड़कर ग्राम पंचायत सचिव के साथ रहना शुरू कर दिया और बच्चों को भी अपने साथ ले गई। ऐसे मामले सामाजिक बहस को जन्म दे रहे हैं, जहां लोग विवाह, विश्वास और आर्थिक स्वतंत्रता जैसे मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं। अनूप कुमार जाटव ने जिला प्रशासन और न्यायालय से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनका कहना है कि उनकी मेहनत और समर्पण के बदले उन्हें अपमान और तिरस्कार मिला। इस मामले में अब अदालत और जिला प्रशासन की ओर से की जाने वाली कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं।