बुद्ध पूर्णिमा 2025: सारनाथ में लाखों अनुयायियों की भीड़, CM योगी करेंगे दर्शन

वाराणसी: बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित सारनाथ में लाखों बौद्ध अनुयायी भगवान बुद्ध की उपदेश स्थली पर दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए उमड़ रहे हैं। वैशाख माह की पूर्णिमा, जो इस वर्ष 12 मई को मनाई जा रही है, बौद्ध धर्म के संस्थापक गौतम बुद्ध के जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण का प्रतीक है। इस खास दिन पर सारनाथ, जहां बुद्ध ने अपना पहला उपदेश दिया था, बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

सारनाथ के मूलगंध कुटी विहार, धमेक स्तूप और चौखंडी स्तूप जैसे पवित्र स्थलों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी जा रही है। बौद्ध अनुयायी बोधिवृक्ष की पूजा कर रहे हैं, दीपक जला रहे हैं और बुद्ध की मूर्तियों पर फूल और फल अर्पित कर रहे हैं। इस बार अस्थि कलश के दर्शन का आयोजन नहीं हो रहा है, जिसके बावजूद देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं है। बौद्ध ग्रंथों का पाठ, सामूहिक ध्यान और दान-पुण्य के कार्य भी जोर-शोर से हो रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी आज सारनाथ पहुंचकर भगवान बुद्ध के दर्शन और पूजा-अर्चना करेंगे। उनके दौरे को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था को चाक-चौबंद कर दिया है। नगर आयुक्त ने हाल ही में सारनाथ का निरीक्षण कर कार्यक्रम की तैयारियों को अंतिम रूप दिया था, ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी असुविधा का सामना न करना पड़े।

सारनाथ में बुद्ध पूर्णिमा का उत्सव केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह करुणा, अहिंसा और शांति के बुद्ध के सिद्धांतों को याद करने का अवसर भी है। अनुयायी बुद्ध की शिक्षाओं का पालन करने का संकल्प ले रहे हैं और कई लोग पिंजरे में बंद पक्षियों को मुक्त कर रहे हैं, जो बुद्ध की सभी जीवों के प्रति सहानुभूति की शिक्षा का प्रतीक है। स्थानीय प्रशासन ने बताया कि इस वर्ष बुद्ध पूर्णिमा पर वाराणसी और आसपास के क्षेत्रों में यातायात और सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अस्थायी बस स्टैंड, पेयजल और चिकित्सा सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं। बौद्ध धर्म के अनुयायियों के साथ-साथ हिंदू श्रद्धालु भी इस पर्व में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं, क्योंकि हिंदू मान्यताओं में बुद्ध को भगवान विष्णु का नौवां अवतार माना जाता है। बुद्ध पूर्णिमा का यह उत्सव न केवल सारनाथ, बल्कि बोधगया, कुशीनगर और लुंबिनी जैसे अन्य बौद्ध तीर्थस्थलों पर भी धूमधाम से मनाया जा रहा है। विश्व भर से आए अनुयायी इस पावन दिन पर बुद्ध के उपदेशों को अपने जीवन में उतारने का प्रण ले रहे हैं।

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