पूर्व केंद्रीय मंत्री गिरिजा व्यास की अंतिम यात्रा: अशोक गहलोत ने अर्थी को दिया कंधा

उदयपुर, 2 मई 2025: राजस्थान की वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. गिरिजा व्यास का गुरुवार को अहमदाबाद के एक अस्पताल में निधन हो गया। 79 वर्षीय गिरिजा व्यास मार्च में उदयपुर में अपने घर पर आरती करते समय आग की चपेट में आ गई थीं, जिससे वे गंभीर रूप से झुलस गई थीं। शुक्रवार को उनकी अंतिम यात्रा में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने उनकी अर्थी को कंधा दिया और श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उदयपुर में कांग्रेस नेताओं और समर्थकों का हुजूम उमड़ा, जिन्होंने अपनी प्रिय नेता को भावभीनी विदाई दी।

शुक्रवार को उदयपुर में डॉ. गिरिजा व्यास की अंतिम यात्रा निकाली गई, जिसमें अशोक गहलोत के साथ-साथ राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, और पूर्व आरटीडीसी चेयरमैन धर्मेंद्र राठौड़ समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। गहलोत ने व्यास के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित किया और उनके परिवार से मिलकर ढांढस बंधाया। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सीपीपी चेयरपर्सन सोनिया गांधी, और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की ओर से भी श्रद्धांजलि दी। अंतिम संस्कार शाम 4 बजे उदयपुर में किया गया।

31 मार्च 2025 को गिरिजा व्यास अपने उदयपुर स्थित आवास पर नवरात्रि के दौरान आरती कर रही थीं, तभी उनकी दुपट्टा जलते दीपक की लौ से छू गया। आग ने उन्हें तेजी से अपनी चपेट में ले लिया, जिससे वे 90% तक झुलस गईं। उन्हें तुरंत उदयपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती किया गया, जहां से बेहतर इलाज के लिए अहमदाबाद के जायडस अस्पताल रेफर किया गया। करीब एक महीने तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद गुरुवार शाम 7:15 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।

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डॉ. गिरिजा व्यास का राजनीतिक करियर पांच दशकों से अधिक का रहा। वे 1985-1990 तक राजस्थान विधानसभा में विधायक रहीं और पर्यटन मंत्री के रूप में कार्य किया। 1991 में वे उदयपुर से लोकसभा सांसद चुनी गईं और 15वीं लोकसभा में चित्तौड़गढ़ का प्रतिनिधित्व किया। वे नरसिम्हा राव सरकार में केंद्रीय मंत्री रहीं और राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष के रूप में भी अपनी छाप छोड़ी। राजस्थान में कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उन्होंने संगठन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। उनकी कविताओं और सामाजिक कार्यों ने उन्हें जनता के बीच लोकप्रिय बनाया।

अशोक गहलोत ने गिरिजा व्यास के निधन को “अपूरणीय क्षति” करार देते हुए कहा, “उनका शिक्षा, राजनीति, और सामाजिक सेवा में योगदान अतुलनीय है। उनका इस हादसे में जाना हम सभी के लिए बड़ा झटका है।” कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने भी उनके निधन पर गहरा दुख जताया, और उनकी महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में योगदान को याद किया। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी शोक व्यक्त करते हुए कहा, “गिरिजा जी का निधन दुखद है। उनकी आत्मा को शांति मिले।”

गिरिजा व्यास के निधन ने राजस्थान में कांग्रेस के लिए एक बड़ा शून्य पैदा कर दिया है। उदयपुर और चित्तौड़गढ़ में उनके समर्थकों ने सड़कों पर उतरकर अपनी नेता को श्रद्धांजलि दी। सोशल मीडिया पर #GirijaVyas और #RIP ट्रेंड करते रहे, जहां लोगों ने उनकी सादगी, कविताओं, और राजनीतिक योगदान को याद किया। कई युवा कार्यकर्ताओं ने उनके साथ बिताए पल साझा किए, जिसमें उनकी प्रेरणादायक बातें शामिल थीं।

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डॉ. गिरिजा व्यास की अंतिम यात्रा में अशोक गहलोत द्वारा अर्थी को कंधा देना उनकी लंबी सियासी सहयोगिता और सम्मान का प्रतीक था। उदयपुर की सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब और नेताओं की मौजूदगी ने साबित कर दिया कि गिरिजा व्यास न केवल एक नेता, बल्कि जनता के दिलों में बसीं थीं। उनका निधन कांग्रेस और राजस्थान की सियासत के लिए एक बड़ी क्षति है, लेकिन उनकी विरासत शिक्षा, महिला सशक्तीकरण, और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में हमेशा जीवित रहेगी।

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