कविता : मातृभाषा हिन्दी

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हिंदी परचम लहराती भाषा
विश्व जगत में छाती भाषा
हर कोई सीखे व अपनाए हिंदी
पंजाबी, सिंधी व गुजराती
की जननी है हिंदी भाषा
संघर्षों से तपके निकली
चमक रही बन के बिजली
बंगला, असमी, व अवधी की
प्यारी मधुरम बोली को
पहचान दिलाती हिंदी भाषा
सूर ,बिहारी, तुलसी, मीरा
रसखान, कबीर और रहीम की
पीड़ा, सृष्टि व ज्ञान है हिंदी
हो साहित्य सृजन, रसधार बहे
हम सब की यही है अभिलाषा
हिंदी परचम लहराती भाषा,
विश्व जगत में छाती भाषा।
तमिल,कन्नड़ और मलयालम
सुब्रमण्यम, रेड्डी और मेनन
दिल से सब अपनाते हिंदी
यूरोप, रूस,गल्फ और अमेरिका से
विश्व पटल तक अपनी पहुंच बनाती हिंदी
सज-धज विश्व का गौरव बनकर उभरे
हम सब की यही है आशा
हिंदी परचम लहराती भाषा,
विश्व जगत में छाती भाषा।

-श्याम नन्दन पाण्डेय
मनकापुर, गोण्डा उत्तर प्रदेश

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