गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुले: चारधाम यात्रा 2025 की भव्य शुरुआत

उत्तराखंड के पवित्र हिमालयी क्षेत्र में स्थित गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट आज, 30 अप्रैल 2025 को अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। इस आयोजन ने विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा 2025 की विधिवत शुरुआत को चिह्नित किया। गंगोत्री धाम के कपाट सुबह 10:30 बजे और यमुनोत्री धाम के कपाट सुबह 11:55 बजे वैदिक मंत्रोच्चार और परंपरागत पूजा-अर्चना के साथ खोले गए।

गंगोत्री धाम, पवित्र गंगा नदी का उद्गम स्थल, में मां गंगा की डोली सुबह 9 बजे मुखबा गांव से रवाना हुई और 10:30 बजे हवन-पूजा के बाद कपाट खोले गए। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रथम पूजा कर देश-प्रदेश की समृद्धि की कामना की। मंदिर को फूलों से सजाया गया, और “हर-हर गंगे” के जयकारों से वातावरण गूंज उठा। गंगोत्री मंदिर समिति के सचिव सुरेश सेमवाल ने बताया कि हजारों श्रद्धालु मां गंगा के दर्शन के लिए उमड़े।

यमुनोत्री धाम, यमुना नदी का उद्गम, में मां यमुना की डोली सुबह 8:30 बजे खरसाली गांव से रवाना हुई। जानकीचट्टी होते हुए डोली धाम पहुंची, जहां 11:55 बजे अभिजीत मुहूर्त में कपाट खोले गए। सूर्यकुंड में स्नान और दिव्य शिला पूजन के बाद श्रद्धालुओं ने मां यमुना के दर्शन किए। मान्यता है कि यमुनोत्री दर्शन से यमलोक से मुक्ति मिलती है।

चारधाम यात्रा, जिसमें यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ, और बद्रीनाथ शामिल हैं, हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखती है। यह यात्रा वामावर्ती क्रम में की जाती है, जो शंकराचार्य की परंपरा का हिस्सा है। गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट खुलने के बाद केदारनाथ धाम के कपाट 2 मई और बद्रीनाथ धाम के कपाट अगले छह महीनों तक ये धाम श्रद्धालुओं के लिए खुले रहेंगे।

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पहलगाम आतंकी हमले के बाद सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। उत्तराखंड पुलिस और प्रशासन ने चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा बल तैनात किए। श्रद्धालुओं के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है, जिसे उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद की वेबसाइट (registrationandtouristcare.uk.gov.in) या व्हाट्सएप नंबर 8394833833 पर “यात्रा” टाइप करके किया जा सकता है। लाखों श्रद्धालुओं ने अब तक रजिस्ट्रेशन कराया है।

कपाट खुलने के अवसर पर मंदिरों को फूलों से सजाया गया, और हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा की गई। मुख्यमंत्री धामी ने कहा, “चारधाम यात्रा हमारी आस्था और सनातन संस्कृति का प्रतीक है। हम श्रद्धालुओं की सुरक्षित और सुगम यात्रा सुनिश्चित करेंगे।” देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा गया।

यात्रा की योजना बनाने वाले श्रद्धालु समय पर रजिस्ट्रेशन करें और मौसम की जानकारी रखें। चारधाम यात्रा 2025 न केवल आध्यात्मिक, बल्कि सांस्कृतिक और पर्यटकीय दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है।

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