हीरे की चमक कम हो गई है – अशोक पाण्डेय

आज के आधुनिक युग में, शीशे की बहुकोणीय काट से।

एल ई डी के प्रकाश में, कृत्रिम उजालों से।

हीरे की चमक कम हो गई है।

कारखाने के धुआं में, जीवन के आपा धापी से।

हीरे पर धुल बैठ गई है, हीरे की चमक कम हो गई है।

अनियमित रहन सहन से, अपौष्टिक खान पान से।

आंखों की रोशनी कम हो गई है, हीरे की चमक कम हो गई है।

महंगाई की मार से, यौहरी की कम ज्ञान से।

झुठे बातो पर विश्वास से, हीरे की चमक कम हो गई है।

अशोक पाण्डेय

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