डोलो 650 को टॉफी की तरह खा रहे भारतीय: स्वास्थ्य जोखिम और दुष्प्रभाव | Health News

नई दिल्ली, 18 अप्रैल 2025: डोलो 650, भारत में बुखार और दर्द के लिए सबसे लोकप्रिय दवाओं में से एक, अब स्वास्थ्य चिंता का विषय बन रही है। अमेरिकी गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. पलनियप्पन मणिक्कम ने हाल ही में एक्स पर लिखा, “भारतीय डोलो 650 को कैडबरी जेम्स की तरह खा रहे हैं।” इस टिप्पणी ने दवा के अत्यधिक उपयोग पर बहस छेड़ दी है।

डोलो 650, जिसमें 650 मिलीग्राम पैरासिटामॉल होता है, भारत में हर घर में आम है। कोविड-19 महामारी के दौरान इसकी मांग बढ़ी, जब लोग बुखार और वैक्सीन के दुष्प्रभावों के लिए इसे ले रहे थे। फोर्ब्स के अनुसार, 2020 के बाद माइक्रो लैब्स ने 350 करोड़ से अधिक डोलो 650 टैबलेट बेचे, जिससे एक साल में 400 करोड़ रुपये की आय हुई। लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि बिना डॉक्टरी सलाह के इसका उपयोग खतरनाक हो सकता है।

पैरासिटामॉल का अत्यधिक सेवन लिवर और किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है। डॉ. राकेश गुप्ता, इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल, नई दिल्ली, कहते हैं, “पैरासिटामॉल तब तक सुरक्षित है जब तक इसे डॉक्टर के निर्देशानुसार लिया जाए। बिना सोचे गोली खाना जोखिम भरा है।”

  • लिवर डैमेज: बार-बार या अधिक मात्रा में डोलो लेने से लिवर पर दबाव पड़ता है, जिससे हेपेटाइटिस या लिवर फेल्योर हो सकता है।
  • किडनी को नुकसान: लंबे समय तक अनियंत्रित उपयोग किडनी की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है।
  • ब्लड प्रेशर: कुछ अध्ययनों में पाया गया कि पैरासिटामॉल का नियमित उपयोग रक्तचाप बढ़ा सकता है।
  • लक्षणों को छिपाना: डॉ. पल के अनुसार, बार-बार डोलो लेने से बीमारी के असल कारण का पता लगाने में देरी हो सकती है।
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विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि डोलो 650 का उपयोग सावधानी से करें। डॉ. सरिन के अनुसार, एक दिन में दो या तीन टैबलेट से अधिक नहीं लेना चाहिए, या आधा टैबलेट तीन से चार बार लिया जा सकता है।

  • बिना डॉक्टरी सलाह के दवा न लें।
  • लिवर या किडनी की समस्या वाले मरीजों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
  • शराब के साथ डोलो 650 लेना खतरनाक हो सकता है।
  • यदि बुखार या दर्द दो दिन से अधिक रहे, तो डॉक्टर से संपर्क करें।

डॉ. पल की पोस्ट ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी। कुछ यूजर्स ने मजाक में कहा, “डोलो के बिना भारतीय घर अधूरा है,” जबकि अन्य ने दवा के दुरुपयोग पर चिंता जताई। एक यूजर ने लिखा, “मेरी मां हल्के बुखार में भी दिन में दो बार डोलो लेती हैं।” इस बहस ने भारत की ‘पिल-पॉपिंग’ संस्कृति पर सवाल उठाए हैं।

अस्वीकरण: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। कोई भी दवा लेने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श करें।

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