5 बड़े झटकों से उबरा शेयर बाजार: कभी ढाई महीने, कभी ढाई साल में लौटी रौनक
भारतीय शेयर बाजार ने अपने इतिहास में कई बार बड़ी गिरावट का सामना किया है, लेकिन हर बार यह संकट से उबरकर मजबूती के साथ वापसी करने में सफल रहा है। इन गिरावटों के पीछे अलग-अलग कारण रहे हैं, जैसे वैश्विक आर्थिक संकट, घरेलू नीतिगत बदलाव, या भू-राजनीतिक अस्थिरता। आइए, पिछले कुछ दशकों में शेयर बाजार की 5 बड़ी गिरावटों, उनके कारणों, और रिकवरी के सफर पर नजर डालते हैं:
1. हर्षद मेहता घोटाला (1992)
- गिरावट: अप्रैल 1992 में सेंसेक्स में करीब 57% की गिरावट देखी गई। यह 28 अप्रैल 1992 को अपने उच्चतम स्तर 4,546 से गिरकर कुछ महीनों में 2,000 के आसपास आ गया।
- कारण: स्टॉक ब्रोकर हर्षद मेहता द्वारा बैंकों और वित्तीय संस्थानों से लिए गए फंड का दुरुपयोग कर शेयरों की कीमतों में हेरफेर किया गया। घोटाला सामने आने पर बाजार धराशायी हो गया।
- रिकवरी: बाजार को वापसी करने में लगभग ढाई साल (1994 तक) लगे। सेंसेक्स ने फिर से तेजी पकड़ी और 1994 में 4,000 के स्तर को पार किया। इस दौरान सेबी (SEBI) की स्थापना और सख्त नियमों ने बाजार में विश्वास बहाल किया।
2. एशियाई वित्तीय संकट (1997-1998)
- गिरावट: सेंसेक्स 1997 में अपने उच्चतम स्तर 4,600 से गिरकर 1998 में 3,000 के नीचे चला गया, यानी करीब 35% की गिरावट।
- कारण: दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में मुद्रा संकट और आर्थिक अस्थिरता का असर भारत पर भी पड़ा। विदेशी निवेशकों ने पूंजी निकाली, जिससे बाजार प्रभावित हुआ।
- रिकवरी: बाजार को संभलने में करीब डेढ़ साल का समय लगा। 1999 तक सेंसेक्स फिर से 4,000 के पार पहुंचा। भारत की मजबूत घरेलू अर्थव्यवस्था और सुधारों ने इसमें मदद की।
3. वैश्विक वित्तीय संकट (2008)
- गिरावट: जनवरी 2008 में सेंसेक्स अपने शिखर 20,873 से गिरकर अक्टूबर 2008 तक 8,701 पर आ गया, यानी 58% से ज्यादा की गिरावट।
- कारण: अमेरिका में सबप्राइम मॉर्गेज संकट और लीमन ब्रदर्स के दिवालिया होने से वैश्विक बाजारों में हाहाकार मचा, जिसका असर भारत पर भी पड़ा। विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली ने स्थिति को बदतर बनाया।
- रिकवरी: बाजार ने तेजी से रिकवरी की और मार्च 2009 से उछाल शुरू हुआ। करीब ढाई महीने में ही सेंसेक्स 13,000 के पार पहुंच गया। सरकारी प्रोत्साहन पैकेज और ब्याज दरों में कटौती ने इसमें बड़ी भूमिका निभाई।
4. कोविड-19 महामारी (2020)
- गिरावट: फरवरी 2020 में सेंसेक्स 41,000 के उच्च स्तर से मार्च 2020 में 25,981 तक लुढ़क गया, यानी लगभग 37% की गिरावट।
- कारण: वैश्विक महामारी और लॉकडाउन के चलते आर्थिक गतिविधियां ठप हो गईं। अनिश्चितता के माहौल में निवेशकों ने भारी बिकवाली की।
- रिकवरी: यह सबसे तेज रिकवरी में से एक थी। मार्च 2020 से ही बाजार में उछाल शुरू हुआ और नवंबर 2020 तक सेंसेक्स 40,000 के पार पहुंच गया। सरकारी राहत पैकेज, कम ब्याज दरें, और वैक्सीन की उम्मीद ने बाजार को जल्दी संभाला।
5. हालिया गिरावट (अक्टूबर 2024 – फरवरी 2025)
- गिरावट: सेंसेक्स अपने उच्चतम स्तर 85,978 (सितंबर 2024) से फरवरी 2025 तक 71,425 तक गिरा, यानी करीब 17% की गिरावट। निफ्टी भी 26,277 से 21,743 तक लुढ़का।
- कारण: पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव, विदेशी निवेशकों की बिकवाली, और कंपनियों के कमजोर तिमाही नतीजों ने बाजार को प्रभावित किया। इसके अलावा, अमेरिकी टैरिफ नीतियों और महंगाई का डर भी बड़ा कारण रहा।
- रिकवरी: यह अभी जारी है। ऐतिहासिक रूप से मार्च का महीना बाजार के लिए सकारात्मक रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बजट में सकारात्मक घोषणाएं होती हैं और वैश्विक हालात स्थिर होते हैं, तो रिकवरी कुछ महीनों में शुरू हो सकती है।
कैसे उबरता है बाजार?
- सरकारी हस्तक्षेप: प्रोत्साहन पैकेज, ब्याज दरों में कटौती, और नीतिगत सुधार बाजार को सहारा देते हैं।
- निवेशकों का विश्वास: घरेलू और विदेशी निवेशकों की वापसी से बाजार में तेजी आती है।
- आर्थिक सुधार: मजबूत जीडीपी वृद्धि, कॉर्पोरेट आय में सुधार, और वैश्विक स्थिरता रिकवरी को गति देते हैं।
- तेजी का समय: रिकवरी का समय संकट की गंभीरता पर निर्भर करता है—कभी ढाई महीने (2009), तो कभी ढाई साल (1992)।
शेयर बाजार की हर बड़ी गिरावट एक सबक और अवसर दोनों लेकर आई है। निवेशकों के लिए धैर्य और लंबी अवधि की रणनीति ही सफलता की कुंजी रही है। वर्तमान में भी, यदि आप बाजार में निवेश की योजना बना रहे हैं, तो विशेषज्ञ बड़ी कंपनियों (लार्ज-कैप) में निवेश की सलाह दे रहे हैं, क्योंकि ये संकट के समय अधिक स्थिर रहती हैं। क्या आपकी राय में बाजार जल्द उबरेगा? अपनी राय जरूर साझा करें!