12 आतंकियों को ढेर करने वाले IPS की कहानी: मायावती से पूछा- ‘CM मैडम, मुझे क्यों सस्पेंड किया?

16 अप्रैल 2025 | The Newswala लखनऊ: भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के 1983 बैच के अधिकारी ओम प्रकाश सिंह (OP Singh) की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। 37 साल के शानदार करियर में उन्होंने 12 आतंकवादियों को ढेर किया, खालिस्तानी आतंकवाद से जूझे, और तीन प्रमुख फोर्सेज—यूपी पुलिस, CISF, और NDRF—में डायरेक्टर जनरल (DG) के रूप में सेवा दी। लेकिन उनकी जिंदगी का सबसे चर्चित पल तब आया, जब 1995 के लखनऊ गेस्ट हाउस कांड के बाद उन्हें सस्पेंड कर दिया गया। तीन साल बाद, उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती से सीधे सवाल किया, “CM मैडम, मुझे क्यों सस्पेंड किया?”

2 जून 1995 को ओपी सिंह ने लखनऊ के SSP के रूप में कार्यभार संभाला। उसी दिन दोपहर 2 बजे, DGP ने उन्हें मीरा बाई मार्ग पर स्थित स्टेट गेस्ट हाउस में “गैरकानूनी तत्वों द्वारा उत्पात” की सूचना दी। उस समय मायावती, जो गेस्ट हाउस में अपने विधायकों के साथ थीं, बहुजन समाज पार्टी (BSP) द्वारा मुलायम सिंह यादव की सरकार से समर्थन वापस लेने की चर्चा में थीं। सिंह, जिला मजिस्ट्रेट और अन्य अधिकारियों के साथ शाम 5:20 बजे मौके पर पहुंचे। लेकिन इस घटना ने यूपी की राजनीति को हिला दिया और सिंह को इसका “खलनायक” बना दिया उन्हें दो FIRs में नामजद किया गया, जिसमें उन पर मायावती के खिलाफ “दुर्भावना” और विधायकों के “अपहरण” का आरोप लगा। रातोंरात वे “परिया” बन गए। उनकी किताब Crime, Grime & Gumption: Case files of an IPS officer में वे लिखते हैं कि उनके वरिष्ठ अधिकारी ने उन्हें अपने कार्यालय से “बाहर निकाल दिया।” कुछ महीनों बाद सरकार ने उन्हें बहाल कर दिया और मामले वापस ले लिए गए, लेकिन इस घटना ने उनके मन पर गहरी छाप छोड़ी।
1998 में, जब सिंह आजमगढ़ रेंज के DIG थे, उन्हें मायावती से मिलने का मौका मिला। अपनी किताब में वे बताते हैं, “मैं लंबे समय से यह पूछना चाहता था। आपके प्रति पूरा सम्मान रखते हुए, मेरे पास कुछ सीधे सवाल हैं।” मायावती ने जवाब दिया, “आप पूछिए।” कांपती आवाज में सिंह ने पूछा, “मैडम, मेरा क्या दोष था? मैं एक गैर-राजनीतिक अधिकारी हूं। मेरा पूरा सेवा रिकॉर्ड यह बताता है… क्या सही काम करने की सजा थी?” मायावती चुप रहीं और सिंह को कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। वे बिना जवाब के वहां से चले गए।
ओपी सिंह का करियर केवल गेस्ट हाउस कांड तक सीमित नहीं था। लखीमपुर खीरी में SP के रूप में उन्होंने नेपाल सीमा पर खालिस्तानी आतंकवाद से निपटा, जहां वे आतंकवादियों के निशाने पर थे। अपनी किताब में वे बताते हैं कि कैसे उन्होंने 12 आतंकवादियों को मार गिराया और कई खतरनाक मिशनों का नेतृत्व किया। उनकी वीरता और रणनीतिक कौशल ने उन्हें यूपी पुलिस में एक सम्मानित नाम बनाया। सिंह ने यूपी पुलिस के DGP के रूप में 2018-2020 तक सेवा दी, जहां उन्होंने 2019 के कुंभ मेले, लोकसभा चुनाव, और अयोध्या राम मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले जैसे महत्वपूर्ण आयोजनों का सफल प्रबंधन किया। उन्होंने यूपी में पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम की शुरुआत भी की। इसके अलावा, वे केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) के DG रहे। 2020 में सेवानिवृत्त होने तक, उनका 37 साल का करियर उपलब्धियों से भरा रहा।

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ओपी सिंह की कहानी साहस, समर्पण, और सत्य के लिए लड़ने की प्रेरणा देती है। गेस्ट हाउस कांड में सस्पेंशन और मायावती से जवाब न मिलने के बावजूद, उन्होंने अपने कर्तव्यों को बखूबी निभाया। आतंकवाद से जंग हो या प्रशासनिक सुधार, सिंह ने हर मोर्चे पर अपनी छाप छोड़ी। The Newswala उनकी इस यात्रा को सलाम करता है और पाठकों को इस तरह की प्रेरक कहानियां लाता रहेगा।

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