सोशल नेटवर्किंग साइट्स AI संभावनाएं और विषमताएं

फेसबुक, इंस्टाग्राम, लिंक्डइन और ट्विटर जैसे सोशल नेटवर्किंग साइट्स के साथ साथ व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे तमाम पर्सनल और ग्रुप चैट वाले एप्प पर हम अपने फोटोज और वीडियोज पोस्ट करते रहते हैं, अपने दैनिक जीवन की हर अच्छे बुरे पहलुओं को अपनों के साथ साझा कर सार्वजनिक करते रहते हैं हमारे इन फोटोज, वीडियोज और पोस्ट को लोग देखते हैं पसंद करते हैं, अच्छे बुरे कॉमेंट्स भी करते हैं और साझा भी करते हैं फ़ोटो, वीडियोज और विचारों को जैसे हैं वैसे ही देखते हैं और आगे बढ़ाते हैं।

अगर हम टॉप सोशल नेटवर्किंग साइट्स की बात करें तो वो इस प्रकार हैं फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप, ट्विटर, लिंक्डइन और वी चैट हमारे हमारे देश मे सबसे ज्यादा उपयोग किये जाने वाले सोशल नेटवर्किंग साइट्स हैं। इसके साथ साथ कुछ भरतीय सोशल नेटवर्किंग साइट्स हैं जिसमे कुछ फेसबुक और ट्विटर की तरह है तो कुछ माइक्रो ब्लॉगिंग साइट्स हैं कू (Koo), टूटर (Tooter), एलीमेंट्स (Elyments), याराबुक (Yaarbook) और हरसरकल (Hercircle) टॉप पांच भारतीय सोशल नेटवर्किंग साइट्स हैं। व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे ऍप्स और सोशल साइट्स पर पर्सनल और ग्रुप चैट में हम हर व्यक्ति को जानते हैं और वो हमारी पहुंच में होता है ज्यादातर हमारे अपने होते हैं।
हर संस्था और कम्पनी यहां तक कि शैक्षणिक और गोपनीय संस्थाओं के अलग कार्य के लिए अलग अलग व्हाट्सएप और टेलीग्राम पर ग्रुप हैं फेसबुक, इंस्टाग्राम और लिंक्डइन पर भी अपने पेज हैं और इन साइट्स पर अपने अपडेट्स और इन्फॉर्मेशन शेयर करते रहते हैं किसी के लिए एडवर्टाइजिंग तो किसी के लिए कमाने का जरिया बने हुए हैं ये ऍप्स और साइट्स आजकल हम अपने हर छोटी छोटी घटनाओं, इवेंट्स और मोमेंट को अपनो के साथ शेयर करते हैं। कोई रोज यो कोई महीने में 1-2 बार तो कोई कभी-कबार आप इन से बच नहीं सकते ।

मेरे कुछ जानने वाले हैं जो फेसबुक और इंस्टाग्राम नहीं चलाते हालांकि वो बहुत जानकर और सक्रिय हैं फिर भी इन सीट्स और एप्प का उपयोग और उपभोग नहीं करते कुछ तो बहुत इंट्रोवर्ट हैं उन्हें अपने निजी जानकारी फ़ोटो और वीडियोज दूसरों के साथ साझा करने में कोई रूचि नहीं और न दूसरों के पर्सनल मैटर में रुचि रखते हैं। तो कुछ ऐसे हैं जिन्हें शौक नहीं है इन सब साइट्स और एप्प के उपभोग का वो इन चीजों के लिए समय नहीं निकाल पाते और बचे हुए हैं इनकी लत से।
थोड़ा थोड़ा समय देते देते कब हम इनके आदी हो जाते हैं हमे पता ही नहीं चलता और ये हमारे कीमती समय और ऊर्जा पर कब्जा कर लेते हैं सोशल मीडिया आज हमारे जीवन का अभिन्न अंग बन चुका है हमारे मित्र, सगे, सम्बन्धी हमारा व्यवसाय और ग्राहक सब सोशल मीडिया से जुड़े हैं जिनकी अवहेलना हुई, आवाज दबायी गई वो सोशल मीडिया पर आ कर चिल्ला लिए भरतीय संविधान में बोलने की पूरी छूट है (फ़्रीडम ऑफ स्पीच एंड एक्सप्रेशंस) सोशल मीडिया जानकारी जुटाने और अपने विचार को व्यक्त करने का जबरदस्त माध्यम बन चुका है, ट्रेंड, हैशटैग और वाइरल जैसे शब्द सोशल मीडिया से विभूषित हुए आप फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल साइट्स पर जिस तरह के कंटेंट देखते हैं ये साइट्स AI की मदद से वही कंटेंट आप के न्यूज़ फीड में सबसे आगे रखते हैं और ढूंढ ढूंढ के लाते हैं, बनाते हैं और बीच- बीच मे नए कंटेंट इन्ट्रोड्वेज करते हैं और हम समय हानि को अनदेखा केर घुसे रहते है इसी में धीरे धीरे लत लग जाती है और अपने काम से ज्यादा इन्हें ही समय देने लगते हैं।

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गूगल के पास हमारे सारे डेटा हैं किसी न किसी साइट्स से वो एक्सेस कर के हमारी सारी जानकारी इकट्ठा कर रखा है हम कहाँ जाते हैं, क्या खाते हैं क्या पहनते हैं और क्या करते हैं के साथ साथ हमारे शौक और पसन्द, न पसंद सब की जानकारी है गूगल और इन सोशल मीडिया साइट्स को। इंटरनेट और नेटवर्किंग वेबसाइट ने लोगों के जीवन को आसान बना दिया है किसी भी टॉपिक पर आप को लेख और वीडियो मिल जाएंगे जिससे आप अच्छे से समझकर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और अपने ज्ञान पिपासा को शांत कर सकते हैं बस जरूरत है सोशल मीडिया का सजगता से संयमित उपयोग करने की।

इंटरनेट पर हर क्षेत्र से संबंधित बृहत जानकारी है आप को फिल्टर करना है, आप को “सूप बनना है चलनी नहीं” जैसे सुपेला अनाज को धारण करता है और कचरे को अलग कर देता जबकि चलनी कचरे को ग्रहण करती है और अनाज को नीचे गिराकर कर अलग कर देती है उसी प्रकार सुपेले की भांति हमे सिर्फ उपयोगी और ज्ञान वर्धक कंटेंट पर ही फ़ोकस करना चाहिए बाकी अनावश्यक चीजों पर ध्यान नहीं देना चाहिए। जिस इंटरनेट और सोशल साइट्स से हम अपने मित्रों और परिवार से दूर रहकर भी जुड़े रहते हैं इनके समीप होने पर मोबाइल को एकदम अलग रखना चाहिए और मित्र व परिजन को समय देकर रिश्तों को मजबूत और खुशनुमा बनना चाहिए।  साइंस और टेक्नोलॉजी इस कदर धूम मचा रखी है कि लगभग 20 प्रतिशत लोग तो इस ग्रह पर रहते ही नहीं वो अंतरिक्ष और अन्य ग्रहों और गैलेक्सी में विलीन हैं। वो विज्ञान और तकनीकी व आधुनिकता में व्यस्त और मस्त हैं, ये धरा उन्हें बहुत बौनी सी लगती है, कुछ प्रबुध्द और व्यवसायी मानव कल्याण हेतु दूसरे ग्रहों पर जीवन और वहाँ पहुंचाने का रास्ता खोज और विकसित कर रहे हैं एक कहावत है जल्दी का काम शैतान का जल्दबाजी हमेशा परेशानी खड़ी करती है चीजें धीरे धीरे और समय पर होनी चाहिए वैज्ञानिकों और तकनीकी क्षेत्र के लोगों को किसी भी अविष्कार या तकनीक को बहुत परख कर उसके प्रो और कॉन्स को मद्देनजर रख कर ही मार्केट में उतारना व उपलब्ध कराना चाहिए साथ साथ किसे क्या परोसना है ये रसोईया को ही पता होता है। 2020 कोरोना काल से ऑनलाइन क्लासेज, वर्क फ्रॉम होम और मोबाइल, टैब व लैपटॉप का प्रयोग ज्यादा बढ़ गया। 13 साल से कम उम्र के बच्चों के हाथों में भी अभिभावकों ने मोबाइल थमा दिया ताकि पढ़ाई व सिलेबस पुरा कर सकें। इसलिए सोशल मीडिया पर कंटेंट ऐज ग्रुप के अनुसार ही उपलब्ध हो।

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शुरुआत से ही वैज्ञानिक ऐसी मशीन की परिकल्पना करते आ रहे हैं जो इंसानों की तरह सोचे पहले से प्रोग्राम किये गए मसीन और रोबोट तो बहुत पहले से बनाये जा चुके हैं। टेक की शीर्ष कंपनियां जैसे माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और अल्फाबेट AI पर काम कर रहीं हैं और इससे आने वाली क्रांति की प्रचारक हैं साथ साथ जनरेटिव एआई ऍप्स को लॉन्च कर निवेशकों को आकर्षित कर रही हैं AI के लॉलीपॉप की वजह से 2020 से ही एप्पल, अमेज़ॉन, माइक्रोसॉफ्ट और अल्फाबेट 5 शीर्ष कंपनियों में बनी हुई हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस(AI) अर्थात कृतिम बुद्धिमत्ता उभरती प्रौद्योगिकियों में से एक है जो एआई सिस्टम में मानवीय तर्क का अनुकरण करने की कोशिश करती है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक कंप्यूटर प्रोग्राम की सीखने और सोचने की क्षमता है।(मशीन लर्निंग)मशीने सीखती हैं और फिर खुद और खुद से बेहतर मशीन बनाती है।

गूगल का गूगल असिस्टेंट, ऐप्पल की सिरी,अमेज़ॉन का एलेक्सा, ये सब AI हैं (John McCarthy) ने 1955 में सबसे बहले आर्टिफिशियल एंटेलीजेंस शब्द का प्रयोग किया इन्हें ही फादर ऑफ ए आई कहा जाता है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बेहतर उत्पादकता और समृद्धि की संभावनाएं अपार हैं, साइंस और टेक्नोलॉजी, मेडिकल साइंस, कंटेंट राईटिंग और एडुकेशन में बहुत सुधार और उन्नति होगी काम को आसान बनाकर स्पीड और एक्युरेसी भी बढायेगी जिन बीमारियों के इलाज बहुत महंगे और जटिल हैं उन्हें आसान और सस्ती बना सकते हैं और आने वाली बीमारी के बारे में पहले से अवगत करा सकता है AI के जरिये या फिर ऑटोमैटिक और सेफ ड्राइविंग गाड़ियां
कोई भी क्षेत्र AI से अप्रभावित नहीं रह सकता सब क्षेत्र में AI काम करेगी। सोशल मीडिया और AI के फायदे और संभावनाओ के बावजूद भी एक लक्ष्मण रेखा निर्धारित होने के साथ साथ सख्त कानून होना चाहिए जिससे इनका दुरुपयोग कम हो सके। AI के आने से सोशल मीडिया पर उपलब्ध हमारे फोटोज और वीडियोज में कोई भी एडिट कर सकता है और उसका गलत इस्तेमाल कर सकता है फर्जी न्यूज साइट्स और मनी लॉन्ड्रिंग पर निगरानी के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा और इंडिविजुअल यूजर की निजता की भी रक्षा इन टेक कंपनियों और सरकार को ध्यान में रखकर वरीयता देनी चाहिए। जो विज्ञान सृजन करता है वही विनाश भी कर सकता है जब 7 वीं-8वीं क्लास में हैम विज्ञान और तकनीक पर निबन्ध
लिखते थे तो “आवश्यकता ही अविष्कार की जननी है” से शुरू होकर “सावधान मनुष्य!! यादि विज्ञान है तलवार तो फेंक दी इसे तज के मोह स्मृति के पार” पर आकर खत्म होता था। हर चीज के अपने फायदे और नुकसान हैं।

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ज्ञान और शक्ति यदि गलत हाथों में लग जाये तो मानवता व प्रकृति दोनों के लिए घातक और विध्वंशक हो जाती है। ज्ञान और डेटा ही शक्ति है अगर सोशल मीडिया और ए आई (AI) का सही तरीके से संयमित उपयोग किया जाए तो ए आई (AI) और सोशल मीडिया एक बहुत अच्छा और उपयोगी माध्यम है।

 

-श्याम नन्दन पांडेय
मनकापुर, गोण्डा, उत्तर प्रदेश
271302

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