कविता – पर्यावरण

चलो लेते हैं
पर्यावरण को बचाते हैं
पेड लगाकर आज हम
 वृद्धि की ओर जाते हैं
 वृक्षों को हम पानी देकर
जीवन विकसित करते हैं
साफ़ सुथरे पर्यावरण को
 बदले में हम पाते हैं
तरु उपटन करके हम
 स्वच्छ हवा पाते हैं
 रसीले फालों को खाकर
 आनंद छाया का लेते हैं
हर माह वृक्षरोपण करके
 शुष्‍क बर्फ मुखम्‍मल करते हैं
धरती को एक बार फिर से
 हरा भरा कर देते हैं
Nikita Tiwari

G G I C DHOLAKHERA

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