आरटीआई के तहत सूचना देने को अपने ड्यूटी का हिस्सा माने जन सूचना अधिकारी

देवरिया |  माननीय राज्य सूचना आयुक्त सुभाष चंद्र सिंह ने आज कलेक्ट्रेट सभागार में विभिन्न विभागों के जनसूचना अधिकारियों के साथ बैठक की और उन्हें आरटीआई अधिनियम-2005 की मूल भावना के अंतर्गत आवेदनों का निस्तारण करने के संबंध में बारीकियों से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि समस्त जन सूचना अधिकारी समय से सूचना देने को अपनी ड्यूटी का हिस्सा बनाएं। उपलब्ध सूचना को नियमानुसार देने में किसी भी प्रकार की आनाकानी न करें। इससे सिस्टम में आम नागरिकों का विश्वास बढ़ता है। राज्य सूचना आयुक्त ने कहा कि प्रायः यह देखने में आता है कि विभिन्न कार्यालयों के जन सूचना अधिकारी जन सूचना अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई सूचनाओं को देने के महत्वपूर्ण कार्य को अतिरिक्त कार्य के रूप में लेते हैं। इसे अतिरिक्त कार्य के तौर पर लेने की मनोवृत्ति से ही सूचना देने में विलंब होता है। प्रत्येक कार्यालय में नामित जन सूचना अधिकारी इसे अपने मूल विभागीय कार्य की तरह ही ड्यूटी का हिस्सा माने और 30 दिन की निर्धारित समयावधि में वादी को सूचना उपलब्ध कराए। उन्होंने कहा कि सूचना का अधिकार मौलिक अधिकार है। जन सूचना अधिकारी अधिनियम की मूल भावना के अनुरूप ससमय सूचना नहीं देंगे वे दंड के भागी होंगे। सूचना देते समय व्यापक लोकहित का ध्यान रखें। राज्य सूचना आयुक्त ने कहा कि जिन जन सूचना अधिकारियों के विरुद्ध आर्थिक दंड लगाया जाता है, उसकी वसूली का दायित्व संबंधित विभाग के आहरण वितरण अधिकारी का होगा।उन्होंने कहा कि अक्सर यह देखने में आता है कि जन सूचना अधिकार के तहत दिए जाने वाले आवेदन सही कार्यालय में नहीं पहुंचते है, जिससे सूचना मिलने में समस्या आती है। ऐसे आवेदनों का अंतरण 5 दिन की अवधि में संबंधित विभाग को कर देना चाहिए। इस दौरान एडीएम वित्त एवं राजस्व नागेंद्र कुमार सिंह, एएसपी डॉ राजेश सोनकर, एसडीएम सदर योगेश कुमार गौड़, जिला विकास अधिकारी रवि शंकर राय, सीओ विनय यादव, सीओ अंशुमान श्रीवास्तव, डीआईओएस वीरेंद्र प्रताप सिंह, बीएसए शालिनी श्रीवास्तव सहित विभिन्न अधिकारी मौजूद थे। आये 88 प्रकरण 65 का हुआ निस्तारण राज्य सूचना आयोग सुभाष चंद्र सिंह ने आज लगातार दूसरे दिन कलेक्ट्रेट स्थित सभागार में विशेष सुनवाई की। आज कुल 88 प्रकरण आये जिनमे से 65 प्रकरणों को गुण दोष के आधार पर निस्तारण किया गया।

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