यूपी में आउटसोर्स कर्मियों की भर्ती 3 साल के लिए, श्रेणी-1 में 40,000 रुपये न्यूनतम वेतन

लखनऊ, 3 सितंबर 2025: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में सरकार ने आउटसोर्सिंग भर्ती नीति में बड़े बदलाव को मंजूरी दी, जिसके तहत अब आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति एक साल के बजाय तीन साल के लिए होगी। इसके साथ ही, विभिन्न श्रेणियों के लिए न्यूनतम वेतन भी निर्धारित किया गया है, जिसमें श्रेणी-1 के पदों के लिए न्यूनतम 40,000 रुपये मासिक वेतन तय किया गया है।

  • तीन साल की नियुक्ति अवधि: पहले आउटसोर्स कर्मचारियों का अनुबंध केवल एक वर्ष के लिए होता था, लेकिन अब यह अवधि बढ़ाकर तीन साल कर दी गई है, जिसके बाद अनुबंध का नवीनीकरण संभव होगा।

  • श्रेणी-1 में 40,000 रुपये न्यूनतम वेतन: चिकित्सीय, अभियंत्रण, व्याख्यान, परियोजना प्रबंधन, लेखा, और वरिष्ठ अनुसंधान जैसे पदों को श्रेणी-1 में शामिल किया गया है, जिनके लिए न्यूनतम वेतन 40,000 रुपये निर्धारित किया गया है।

    • श्रेणी-2 (जैसे कार्यालय स्तर-2, आशुलिपिक, नर्सिंग, फार्मेसी) के लिए न्यूनतम 25,000 रुपये।

    • श्रेणी-3 (जैसे जूनियर असिस्टेंट, टाइपिस्ट, डेटा एंट्री ऑपरेटर) के लिए न्यूनतम 22,000 रुपये।

    • श्रेणी-4 (जैसे चपरासी, चौकीदार, सफाईकर्मी) के लिए न्यूनतम 20,000 रुपये।

  • पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया: उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम के माध्यम से भर्तियां गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल पर पारदर्शी तरीके से होंगी।

  • वेतन सीधे खाते में: कर्मचारियों का वेतन हर महीने 1 से 5 तारीख के बीच सीधे उनके बैंक खातों में जमा होगा, जिससे बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी।

  • अन्य सुविधाएं: कर्मचारियों को ईपीएफ, ईएसआई, और मातृत्व अवकाश की सुविधा मिलेगी। सेवा के दौरान मृत्यु होने पर 15,000 रुपये अंतिम संस्कार सहायता राशि दी जाएगी।

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योगी सरकार ने आउटसोर्सिंग सेवाओं को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए ‘उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम’ के गठन को मंजूरी दी है। यह निगम कंपनीज एक्ट-2013 की धारा 8 के तहत एक गैर-लाभकारी सार्वजनिक कंपनी के रूप में काम करेगा। निगम 92 सरकारी विभागों, स्थानीय निकायों, और शैक्षणिक संस्थानों में भर्तियां करेगा। नई नीति में अनुसूचित जाति (21%), अनुसूचित जनजाति (2%), अन्य पिछड़ा वर्ग (27%), आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, दिव्यांगजन, पूर्व सैनिक, और महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान है। इसके अलावा, कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा।

पहले आउटसोर्स कर्मचारियों को कम वेतन और समय पर भुगतान न होने की शिकायतें थीं। कई बार एजेंसियां पीएफ की राशि जमा नहीं करती थीं, जिससे कर्मचारियों का शोषण होता था। नई व्यवस्था में वेतन और सुविधाएं सीधे कर्मचारियों के खाते में जाएंगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और शोषण रुकेगा। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा, “यह निर्णय लाखों युवाओं को बेहतर रोजगार अवसर प्रदान करेगा और प्रदेश में सुशासन का नया मॉडल स्थापित करेगा। कर्मचारियों को उनका पूरा हक मिलेगा और उनका भविष्य सुरक्षित होगा।”

इस फैसले से उत्तर प्रदेश के लाखों आउटसोर्स कर्मचारियों को लाभ होगा। पहले न्यूनतम वेतन लगभग 10,000 रुपये था, जो अब बढ़कर 20,000 से 40,000 रुपये हो गया है। इससे कर्मचारियों का जीवन स्तर बेहतर होगा और वे सम्मान के साथ काम कर सकेंगे। योगी सरकार का यह कदम आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए एक बड़ी राहत है। तीन साल की निश्चित नियुक्ति अवधि, बढ़ा हुआ वेतन, और बेहतर सुविधाएं कर्मचारियों को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करेंगी। यह नीति न केवल रोजगार के अवसर बढ़ाएगी बल्कि भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और कर्मचारी हितैषी बनाएगी।

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