गौरा क भवरिया के करे मोरी माई रे…
- वरिष्ठ नगरिक संरक्षण संस्थान का हुआ होली मिलन एवं कवि सम्मेलन

मीरजापुर:वरिष्ठ नागरिक संरक्षण संस्थान मीरजापुर के तत्वावधान में महंथसिवाला स्थित कार्यालय सभागार में वासंतिक वातावरण में रितुराज के स्वागत में होली मिलन के अवसर पर कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का आयोजन बाबू राजकुमार सिंह की अध्यक्षता में हुआ। जिसका संचालन संस्था के सचिव एवं कवि लालव्रत सिंह सुगम ने किया।माँ सरस्वती के पूजन एवं प्रार्थना के बाद समारोह का शुभारंभ करते हुए कवयित्री सारिका चौरसिया ने सरस्वती वंदना ‘वीणा वादिनी जय शारदे माँ,मुझे भी वर दे,मुझे भी स्वर दे’ प्रस्तुत किया। वरिष्ठ कवि एवं साहित्यकार भोलानाथ कुशवाहा ने पढ़ा ‘बादल कड़क रहे क्यों ऐसे,बिजली चमक रही क्यों ऐसे ?’ , हास्य एवं व्यंग्यकार लालव्रत सिंह सुगम ने एक अनूठा दोहा सुनाया-‘शादी करने से सुलभ सास, ससुर, ससुरार,साली,सरहज,साढ़ु संग सढ़ुवाइन पियसार’ , अमरनाथ सिंह ने मातृभूमि की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए पढ़ा-‘यह भूमि परम पावन महान,बलिदानों की गाथा कहती।कितने-कितने इतिहास रची है,वीर भाव धारा बहती।’ वकील अहमद मिर्जापुरी ने पढ़ा-‘ आयी बसंत बहार सखी,मुरझाइ गयो सब वृक्ष की पाती।’ कवि जगदीश प्रसाद पांडेय ने सुनाया-‘नमन है उन बलिदानियों को,जिनके त्याग से मिली आजादी।’ प्रमोद कुमार गुप्त ने पढ़ा-‘विश्वास की भूमि पर उगा था आम का पेड़,भरा था उसमें प्रेम का रंग।’ हौसिला प्रसाद मिश्र ने माँ गौरा के विवाह से संबंधित लोकगीत प्रस्तुत किया-‘गौरा के भवरिया के करी मोरी माई रे..।’
इनके अतिरिक्त कार्यक्रम में सर्वश्री भुपेंद्र सिंह डंग, सिद्धनाथ सिंह,अजय कुमार मेहरोत्रा,योगेंद्र प्रसाद गुप्ता,गोपाल टंडन,निर्भय कुमार अग्रवाल,ओम प्रकाश,अरविंद कुमार सिंह,अनुज प्रताप सिंह,रमेश चंद दुबे,पन्नालाल विश्वकर्मा, अभिषेक कुमार सिंह आदि रसज्ञ श्रोतागण कार्यक्रम में सहभागिता किये। अंत में अध्यक्ष बाबू राजकुमार सिंह के आभार प्रदर्शन के साथ समारोह का विसर्जन हुआ।