विरोध : निजीकरण के विरोध में भारतीय मजदूर संघ ने निकाली रैली

प्रभु सिंह, पिंडवाड़ा (सिरोही) | भारतीय मजदूर संघ ने श्रमिक कानूनों में संशोधन के विरोध में रैली आयोजित कर प्रदर्शन किया।  श्रमिक विरोधी कानूनों के विरुद्ध में जिला कलेक्टर के माध्यम से प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया । इस अवसर पर वोलकेम इंडिया के दिनेश पुरोहित ने कहा कि “सरकार चाहे कोई भी हो जो भी  श्रमिक विरोधी कानून लाएगा,भारतीय मजदूर संघ पूरी ताकत के साथ में उसको जवाब देगा”। इस अवसर पर जेके लक्ष्मी सीमेंट से टिला राम देवासी ने अपने संबोधन में कहा कि “सरकार जो श्रम विरोधी कानून में संशोधन व निजीकरण को किसी भी सूरत में भारतीय मजदूर संघ लागू नहीं होने देगा । राष्ट्र निर्माता मजदूर की अनदेखी सरकार को भारी पड़ेगी। मजदूर ने इस देश को अपने खून पसीने से उन्नति के शिखर पर पहुंचाया है,उनकी अनदेखी भारतीय मजदूर संघ कभी बर्दाश्त नहीं कर सकता,समय रहते यदि सरकार ने अपने निर्णय वापस नहीं लिए तो भविष्य में संगठन को उग्र प्रदर्शन का सहारा लेना पड़ेगा । जिसकी समस्त जिम्मेदारी सरकार की रहेगी”।

अल्ट्राटेक सीमेंट से नारायण राम गरासिया ने बताया कि भारत सरकार ने  श्रमिकों के लिये बने 44 कानूनों को समाप्त कर 4 नये कानून बनाए हैं ।सरकार ने वेतन संहिता , औद्योगिक संबंध संहिता ,सामाजिक सुरक्षा संहिता , कार्यस्थल पर व्यावसायिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य संहिता के कानून बनाये है । जिसमें कुछ कानून श्रमिक व मजदूरों के विरुद्ध है जिसका  भारतीय मजदूर संघ पूरजोर विरोध करता है ।

रैली  में दिनेश पुरोहित ,गणेश सिंह गुर्जर, वकत्ताराम, राम सिफत राय, दानवीर सिंह देवड़ा, वना राम देवासी, , आंगनवाडी से इंदु बाला चौहान ,पुष्पा सोलंकी,कार्यकर्ता चंदन कुंवर ,आचा माली आदि सैकड़ो मजदूरों ने भाग लेकर विरोध प्रदर्शन किया।

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क्या है नया कानून

नए श्रम कानून संशोधन 2020 में यूपी समेत 7 बीजेपी शासित राज्यों में यह कानून लागू किया गया है। इस कानून में काम करने के घंटों को 8 की जगह 12 घंटे कर दिया गया है लेकिन यहां सरकार ने कहा है कि 12 घंटे का काम वर्कर अपनी इच्छा से कर सकता है।

  • यूपी में अब केवल भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार (नियोजन तथा सेवा शर्तों का विनियमन) अधिनियम, 1996 लागू होगा
  • उद्द्योगों को कामगार क्षतिपूर्ति अधिनियम, 1923 और बंधुआ मजदूरी प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम 1976 का पालन करना होगा।
  • उद्योगों पर अब पारिश्रमिक भुगतान अधिनियम, 1936 की धारा 5 लागू होगी।
  • इस कानून में बाल मजदूरी और महिला मजदूरों से जुड़ें प्रावधान जारी रहेंगे।
  • इन कानूनों के अलावा बाकी सभी कानून अगले 1000 दिनों के लिए स्थगित किए गये हैं।
  • नए कानून में विवादों का निपटारा, मजदूरों का स्वास्थ्य, उनके काम करने से जुड़े कानून और काम की सुरक्षा को कानूनी रूप से समाप्त कर दिया गया है।
  • इतना ही नहीं इस कानून में ट्रेड यूनियन को मान्यता देने वाले कानून को भी खत्म कर दिया गया है।
  • कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले मजदूर और प्रवासी मजदूरों से जुड़े कानून भी खत्म कर दिए गये हैं।
  • उद्योगों में अगले तीन माह तक अपनी सुविधा को देखते हुए काम कराने की पूरी छुट दी गई है।

 

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