बिना चुनाव लड़े दीपक प्रकाश बने नीतीश कैबिनेट मंत्री, राजनीतिक सेटिंग की चर्चा जोरों पर
पटना, 20 नवंबर 2025 (द न्यूजवाला):बिहार की नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में एक ऐसा नाम उभरा जो राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बन गया – उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश। बिना विधानसभा चुनाव लड़े ही राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के कोटे से मंत्री पद की शपथ लेने वाले 36 वर्षीय दीपक ने युवा ऊर्जा का नया चेहरा पेश किया। गांधी मैदान में आयोजित भव्य समारोह में जींस-शर्ट और क्रॉक्स जूते पहनकर शपथ लेने पहुंचे दीपक की यह अदा सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, जो पारंपरिक राजनीति से हटकर एक आधुनिक छवि का प्रतीक बनी। यह नियुक्ति एनडीए गठबंधन की आंतरिक डील का नतीजा बताई जा रही है, जहां कुशवाहा परिवार को विशेष तरजीह मिली।
शपथ ग्रहण के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में कुल 26 मंत्रियों ने पद ग्रहण किया, जिसमें भाजपा को 14, जेडीयू को 8, लोजपा (आरवी) को 2, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेकुलर) को 1 और आरएलएम को 1 पद मिला। आरएलएम को मिले इस एकमात्र पद पर उपेंद्र कुशवाहा ने अपने बेटे दीपक प्रकाश को चुना, जबकि उनकी पत्नी स्नेहलता कुशवाहा सासाराम से विधायक चुनी गई थीं और उनका नाम पहले मंत्री पद के लिए चर्चा में था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी सीट बंटवारे में आरएलएम को 6 सीटें मिलीं, जिनमें से 4 पर जीत हासिल की, लेकिन कुशवाहा की नाराजगी के बाद एनडीए ने एमएलसी सीट का वादा कर यह सेटिंग तय की। दीपक ने शपथ लेने के बाद मीडिया से कहा, “मुझे भी कुछ ही घंटे पहले पता चला। कपड़ों से क्या फर्क पड़ता है, काम से मापा जाएगा।”
दीपक प्रकाश का जन्म 22 अक्टूबर 1989 को पटना में हुआ। उन्होंने पटना से ही 2005 में आईसीएसई बोर्ड से 10वीं और 2007 में सीबीएसई से 12वीं पूरी की। इसके बाद एमआईटी मणिपुर से कंप्यूटर साइंस में बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की और 2011 से 2013 तक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में काम किया। राजनीति में उनका प्रवेश 2019 में पिता के साथ हुआ, जब वे आरएलएम के प्रचार और संगठन में सक्रिय हो गए। हालिया बिहार चुनाव में दीपक ने मां स्नेहलता के सासाराम प्रचार की कमान संभाली, जो सफल रही। उनकी लव मैरिज और आधुनिक लाइफस्टाइल ने उन्हें युवाओं के बीच लोकप्रिय बना दिया है।
यह नियुक्ति बिहार राजनीति में पारिवारिक उत्तराधिकार की एक मिसाल पेश करती है। चिराग पासवान और जीतन राम मांझी के बेटों को भी कैबिनेट में जगह मिली, लेकिन दीपक का बिना चुनाव लड़ना सबसे अनोखा है। विपक्ष ने इसे “राजनीतिक भाई-भतीजावाद” करार दिया है, जबकि एनडीए इसे गठबंधन की मजबूती का प्रतीक बता रहा है। आरएलएम के 4 विधायकों के बावजूद बेटे को तरजीह देकर उपेंद्र कुशवाहा ने परिवार को मजबूत करने की रणनीति अपनाई।
भविष्य में दीपक प्रकाश पर नजरें टिकी हैं, क्योंकि वे बिना विधानसभा सदस्यता के मंत्री के रूप में काम करेंगे। संवैधानिक रूप से यह संभव है, लेकिन 6 महीने के अंदर विधान परिषद सदस्यता लेनी होगी। उनकी युवा छवि बिहार सरकार को नई दिशा दे सकती है, खासकर आईटी और युवा विकास के क्षेत्रों में। यह घटना एनडीए की एकजुटता को दर्शाती है, जहां छोटे सहयोगियों को भी महत्व दिया गया।