राजस्थान में 7 हजार स्लीपर बसों का चक्काजाम: अनिश्चितकाली हड़ताल से लाखों यात्री फंसे, RTO कार्रवाई के खिलाफ ऑपरेटरों की मांग; बुकिंग रद्द, ट्रेनें फुल

जयपुर, 31 अक्टूबर 2025 (द न्यूज़वाला डेस्क): राजस्थान में परिवहन का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट बस ऑनर एसोसिएशन ने अनिश्चितकाली हड़ताल का ऐलान करते हुए 31 अक्टूबर यानी आज से पूरे प्रदेश में 7-8 हजार स्लीपर बसों का चक्काजाम कर दिया। जयपुर, उदयपुर और भीलवाड़ा को छोड़कर बाकी जिलों में ये बसें सड़कों से गायब हो गई हैं, जिससे रोजाना 3 लाख से अधिक यात्रियों को भारी परेशानी हो रही है। एसोसिएशन ने 2 नवंबर से चक्का जाम की चेतावनी भी दी है, जिसमें 20 हजार से ज्यादा प्राइवेट बसें शामिल हो सकती हैं। हाल के बस हादसों के बाद RTO की सख्त कार्रवाई के खिलाफ ऑपरेटरों ने यह कदम उठाया है।

हड़ताल का मुख्य कारण हाल ही में हुए जैसलमेर, जोधपुर और जयपुर बस हादसे हैं, जहां RTO ने नियम उल्लंघन के आरोप में कई बसों के चालान काटे और कुछ को सीज कर लिया। एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र शर्मा ने कहा, “परिवहन विभाग एकतरफा कार्रवाई कर रहा है। यात्रियों को बीच रास्ते उतारकर बसें बंद की जा रही हैं। हमें कम से कम 3-6 महीने का समय दें ताकि बसों को फिटनेस के मानकों पर अपग्रेड कर सकें।” ऑनलाइन बुकिंग ऐप्स पर सभी टिकट रद्द कर दिए गए हैं, और एडवांस पेमेंट वाले यात्रियों को रिफंड की प्रक्रिया शुरू हो गई है। जयपुर के सिंधी कैंप बस स्टैंड पर तो बसें खड़ी हैं, लेकिन लंबी दूरी के रूट्स पर यात्रियों को ट्रेनों या अन्य विकल्पों पर निर्भर होना पड़ रहा है।

इस हड़ताल से टूरिस्टों और ग्रामीण यात्रियों पर सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है। जोधपुर, सीकर, कोटा और उदयपुर जैसे शहरों में हजारों लोग फंसे हुए हैं। एक यात्री ने बताया, “मैं दिल्ली जा रहा था, लेकिन बस कैंसल हो गई। अब ट्रेन का इंतजार कर रहा हूं, जो पहले से फुल है।” एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने मांगें नहीं मानीं तो 2 नवंबर से स्टेज कैरिज, कॉन्ट्रैक्ट कैरिज, स्कूल बसें और लोक परिवहन वाली सभी प्राइवेट बसें हड़ताल में शामिल हो जाएंगी, जिससे 40 लाख से अधिक लोग प्रभावित होंगे।

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परिवहन विभाग के अधिकारियों ने कहा कि वे एसोसिएशन से बातचीत कर रहे हैं, लेकिन सुरक्षा मानकों में कोई समझौता नहीं होगा। हाल के हादसों में 50 से अधिक मौतें हो चुकी हैं, जिसके बाद सख्ती बढ़ाई गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह हड़ताल फार्मा उद्योग की तरह गुणवत्ता नियंत्रण पर बहस छेड़ सकती है, लेकिन यात्रियों के लिए तत्काल राहत जरूरी है।

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