जुकाम-एलर्जी दवा का सैंपल फेल: वाईएल फार्मा की टैबलेट पर बिक्री रोक, CDSCO ने अन्य दवाओं के सैंपल लेने के आदेश दिए; स्वास्थ्य जोखिम बढ़ा
नई दिल्ली, 31 अक्टूबर 2025 (द न्यूज़वाला डेस्क): केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने एक बड़ा कार्रवाई करते हुए वाईएल फार्मा (YL Pharma) की एक प्रमुख जुकाम और एलर्जी की दवा की टैबलेट को ‘नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी’ (NSQ) घोषित कर दिया है। इस अमानक सैंपल के चलते दवा की बिक्री पर तत्काल रोक लगा दी गई है। कंपनी की अन्य दवाओं के सैंपल भी अब जांच के दायरे में आ गए हैं, और राज्य दवा नियंत्रकों को इनके सैंपल एकत्र करने के सख्त आदेश जारी किए गए हैं। यह कदम दवा की गुणवत्ता और उपभोक्ता सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है, जो हाल के महीनों में बढ़ते NSQ मामलों के बीच एक चेतावनी का संकेत है।
CDSCO की मासिक अलर्ट लिस्ट के अनुसार, वाईएल फार्मा की यह टैबलेट (जिसमें मुख्य रूप से सेटिरिज़ाइन डाइहाइड्रोक्लोराइड और फेक्सोफेनाडाइन जैसे घटक हैं) गुणवत्ता परीक्षण में फेल हो गई। सैंपल की जांच रीजनल ड्रग टेस्टिंग लेबोरेटरी (RDTL) चंडीगढ़ में की गई, जहां यह पाया गया कि दवा में सक्रिय तत्वों की मात्रा निर्धारित मानकों से कम है। इससे जुकाम, छींक, नाक बहना जैसी एलर्जी संबंधी समस्याओं में इसका असर कम हो सकता है, और लंबे उपयोग से स्वास्थ्य जोखिम बढ़ सकता है। CDSCO ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बाजार में उपलब्ध सभी बैचों की बिक्री रोकी जाए, और मेडिकल स्टोर्स पर इसका स्टॉक वापस मंगाया जाए।
इस घटना ने वाईएल फार्मा पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जो उत्तर भारत में एक उभरती फार्मा कंपनी है। CDSCO ने कंपनी को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है, साथ ही उनकी अन्य दवाओं जैसे एंटीबायोटिक्स, विटामिन सप्लीमेंट्स और पेनकिलर्स के सैंपल तुरंत लेने का आदेश दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम फार्मा उद्योग में गुणवत्ता नियंत्रण को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। नीचे दी गई तालिका में NSQ घोषित दवा की मुख्य डिटेल्स दी गई हैं:
| दवा का नाम | कंपनी | बैच नंबर | समस्या | जांच लैब |
|---|---|---|---|---|
| सेटिरिज़ाइन + फेक्सोफेनाडाइन टैबलेट (जुकाम-एलर्जी) | वाईएल फार्मा | YL-2025-01 | सक्रिय तत्व कम, अमानक गुणवत्ता | RDTL चंडीगढ़ |
CDSCO के महानिदेशक डॉ. राजीव सिंह ने एक बयान में कहा, “दवा की गुणवत्ता में कोई समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हम हर महीने सैंपल टेस्टिंग के जरिए बाजार की निगरानी कर रहे हैं, और NSQ पाए जाने पर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करते हैं।” जनवरी 2025 से अब तक CDSCO ने 145 से अधिक दवाओं को NSQ घोषित किया है, जिनमें हाइपरटेंशन, एलर्जी और मतली की दवाएं शामिल हैं। इनमें से कई मामलों में कंपनियां स्पूरियस (नकली) दवाओं का हवाला दे रही हैं, लेकिन उपभोक्ताओं को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
फार्मा विशेषज्ञ डॉ. अनिता शर्मा ने बताया, “ऐसी दवाओं का उपयोग करने से एलर्जी के लक्षण बिगड़ सकते हैं या साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। हमेशा QR कोड या बैच नंबर चेक करें।” CDSCO ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे अपनी दवाओं के बैच को वेरिफाई करें और किसी भी संदेह में स्थानीय दवा नियंत्रक से संपर्क करें। कंपनी की ओर से अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन अपेक्षा है कि जल्द ही स्पष्टीकरण जारी होगा।