बंगाल विधानसभा में भारी हंगामा, भाजपा और तृणमूल विधायक भिड़े
कोलकाता, 4 सितंबर 2025: पश्चिम बंगाल विधानसभा में गुरुवार को भारी हंगामा देखने को मिला, जब भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के विधायकों के बीच तीखी नोकझोंक और मारपीट की नौबत आ गई। यह हंगामा बीजेपी के उस आरोप के बाद शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने टीएमसी सरकार पर बीजेपी शासित राज्यों में बंगाली प्रवासियों पर कथित अत्याचार का मुद्दा उठाने के लिए बुलाए गए विशेष सत्र को गलत ठहराया। दूसरी ओर, टीएमसी ने बीजेपी पर विधानसभा की गरिमा को ठेस पहुंचाने और हिंसा भड़काने का आरोप लगाया। इस घटना ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया तनाव पैदा कर दिया है, खासकर 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले।
विशेष सत्र का आयोजन टीएमसी सरकार ने बीजेपी शासित राज्यों में बंगाली प्रवासियों पर कथित अत्याचारों के खिलाफ विरोध दर्ज करने के लिए किया था। टीएमसी ने दावा किया कि बीजेपी शासित राज्यों में बंगाली भाषी लोगों के साथ भेदभाव और हिंसा हो रही है, जिसके विरोध में कोलकाता के मैदान क्षेत्र में ‘भाषा आंदोलन’ मंच बनाया गया था। इस मंच को भारतीय सेना द्वारा हटाए जाने की घटना ने विवाद को और हवा दी। टीएमसी सुप्रीमो और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बीजेपी पर इसे “लोकतंत्र विरोधी और असंवैधानिक” कदम करार देते हुए तीखा हमला बोला।
सदन में टीएमसी विधायकों ने इस मुद्दे पर चर्चा की मांग की, लेकिन बीजेपी विधायकों ने इसे “राजनीतिक नौटंकी” बताते हुए विरोध शुरू कर दिया। बीजेपी विधायक और विपक्ष के नेता सुवendu अधकारी ने आरोप लगाया कि टीएमसी सरकार इस सत्र का इस्तेमाल केवल जनता का ध्यान भटकाने के लिए कर रही है। इसके जवाब में टीएमसी विधायकों ने बीजेपी पर बंगाल की संस्कृति और भाषा का अपमान करने का आरोप लगाया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच नारेबाजी शुरू हो गई।
हंगामा तब और बढ़ गया जब बीजेपी विधायकों ने सदन के वेल में आकर प्रदर्शन शुरू किया और “ममता सरकार हाय हाय” और “बंगाल में अराजकता बंद करो” जैसे नारे लगाए। जवाब में, टीएमसी विधायकों ने “बीजेपी गुंडागर्दी बंद करो” और “जय बांग्ला” के नारे लगाए। स्थिति तब बेकाबू हो गई जब दोनों पक्षों के विधायक एक-दूसरे की ओर बढ़े और धक्का-मुक्की शुरू हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ विधायकों ने एक-दूसरे पर कुर्सियां तक फेंकी, जिससे सदन में अफरा-तफरी मच गई।
स्पीकर बिमान बनर्जी ने स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की, लेकिन हंगामा थमने का नाम नहीं ले रहा था। आखिरकार, सदन की कार्यवाही को 30 मिनट के लिए स्थगित करना पड़ा। इस दौरान, बीजेपी के कुछ विधायकों को मार्शल द्वारा सदन से बाहर ले जाया गया, जिसे बीजेपी ने “लोकतंत्र की हत्या” करार दिया। टीएमसी ने दावा किया कि बीजेपी विधायकों ने पहले हमला किया, जबकि बीजेपी ने टीएमसी पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया।
हंगामे के बाद, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने स्वयं सदन में आकर बीजेपी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “बीजेपी बंगाल की संस्कृति और भाषा को खत्म करना चाहती है। वे हमारे लोगों को डराने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन हम डरने वाले नहीं हैं।” ममता ने बीजेपी पर “गुंडागर्दी” का आरोप लगाते हुए कहा कि वे विधानसभा को “संसद की तरह अराजक” बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
बीजेपी के वरिष्ठ नेता और विधायक शंकर घोष ने जवाब में कहा, “टीएमसी सरकार हर मुद्दे को राजनीतिक रंग देती है। सेना ने नियमों के अनुसार मंच हटाया था, लेकिन टीएमसी इसे बंगाल के खिलाफ साजिश बता रही है।” उन्होंने ममता बनर्जी से मांग की कि वे इस “नाटक” को बंद करें और बंगाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर ध्यान दें।
यह पहली बार नहीं है जब बंगाल विधानसभा में बीजेपी और टीएमसी विधायकों के बीच टकराव हुआ है। मार्च 2022 में भी रामपुरहाट हिंसा के मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच मारपीट हो गई थी, जिसमें कई विधायक घायल हो गए थे। उस समय बीजेपी ने ममता बनर्जी से कानून-व्यवस्था पर बयान देने की मांग की थी, जिसे टीएमसी ने खारिज कर दिया था। तब बीजेपी के पांच विधायकों, जिसमें सुवendu अधकारी और मुख्य सचेतक मनोज टिग्गा शामिल थे, को निलंबित कर दिया गया था।
यह हंगामा ऐसे समय में हुआ है जब 2026 में होने वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं। टीएमसी ने 2021 के चुनाव में 213 सीटों के साथ प्रचंड जीत हासिल की थी, जबकि बीजेपी 77 सीटों के साथ मुख्य विपक्षी दल बनी थी। बीजेपी इस घटना को बंगाल में टीएमसी की “तानाशाही” के खिलाफ प्रचार के लिए इस्तेमाल कर सकती है, जबकि टीएमसी इसे बंगाल की पहचान और भाषा की रक्षा के मुद्दे से जोड़ रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह हंगामा दोनों दलों के लिए जनता के बीच अपनी स्थिति मजबूत करने का अवसर है। कोलकाता के राजनीतिक विश्लेषक बिस्वनाथ चक्रवर्ती ने कहा, “टीएमसी बंगाली अस्मिता को मुद्दा बनाकर वोटरों को लुभाने की कोशिश कर रही है, जबकि बीजेपी इसे टीएमसी की नाकामी के रूप में पेश कर रही है। यह 2026 के लिए एक शुरुआती जंग है।”
हंगामे के बाद कोलकाता पुलिस ने विधानसभा परिसर में सुरक्षा बढ़ा दी है। पुलिस ने दोनों पक्षों के विधायकों से शांति बनाए रखने की अपील की है। हालांकि, अभी तक किसी विधायक के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं की गई है। स्पीकर बिमान बनर्जी ने कहा कि वे सदन की कार्यवाही की समीक्षा करेंगे और दोषी विधायकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सोशल मीडिया पर इस हंगामे को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे बंगाल की राजनीति में बढ़ते तनाव का संकेत मान रहे हैं, जबकि अन्य इसे “सस्ता ड्रामा” बता रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “विधानसभा में मारपीट से क्या बंगाल का भला होगा? दोनों दल जनता के असल मुद्दों पर ध्यान दें।”