लखनऊ में फर्जी IAS का भंडाफोड़: 6 लग्जरी गाड़ियां, निजी बॉडीगार्ड और ‘भारत सरकार’ की नेमप्लेट्स के साथ ठगी का खेल

लखनऊ, 4 सितंबर 2025: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में वजीरगंज पुलिस ने एक सनसनीखेज मामले का खुलासा किया है, जिसमें एक शख्स को फर्जी IAS अधिकारी बनकर लोगों को ठगने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। इस फर्जी अधिकारी की पहचान नोएडा के सेक्टर 35, गरिमा विहार निवासी सौरभ त्रिपाठी के रूप में हुई है। सौरभ ने न केवल फर्जी दस्तावेजों और सरकारी पास के साथ रौब जमाया, बल्कि उसके पास 6 लग्जरी गाड़ियों का काफिला, निजी बॉडीगार्ड, और गाड़ियों पर ‘भारत सरकार’ व ‘उत्तर प्रदेश शासन’ की प्लेट्स भी थीं। इस मामले ने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है।

वजीरगंज पुलिस ने कारगिल शहीद पार्क के पास नियमित वाहन चेकिंग के दौरान सौरभ त्रिपाठी को पकड़ा। पुलिस उपायुक्त पश्चिम विश्वजीत श्रीवास्तव के अनुसार, एक इनोवा क्रिस्टा गाड़ी को रुकने का इशारा किया गया, लेकिन चालक ने गाड़ी भगाने की कोशिश की। जब गाड़ी रोकी गई, तो पीछे बैठे सौरभ ने खुद को IAS और केंद्रीय सचिव बताते हुए पुलिस पर रौब झाड़ने की कोशिश की। उसने तुरंत एक फर्जी विजिटिंग कार्ड थमाया, लेकिन उसका व्यवहार पुलिस को संदिग्ध लगा। गाड़ी की तलाशी में लाल-नीली बत्तियां, फर्जी सरकारी पास, और ‘भारत सरकार’ व ‘उत्तर प्रदेश शासन’ की नेमप्लेट्स मिलीं, जिसके बाद उसकी पोल खुल गई।

पुलिस जांच में सामने आया कि सौरभ के पास 6 लग्जरी गाड़ियां थीं, जिनमें लैंड रोवर डिफेंडर, टोयोटा फॉर्च्यूनर, मर्सिडीज, और इनोवा क्रिस्टा शामिल थीं। इन गाड़ियों की कीमत करोड़ों रुपये में है। लैंड रोवर डिफेंडर की कीमत 97 लाख से 2.79 करोड़ रुपये, फॉर्च्यूनर की 36 लाख से 52 लाख रुपये, और मर्सिडीज की 33.44 लाख से 1.90 करोड़ रुपये तक है। इन गाड़ियों पर फर्जी सरकारी पास और ‘भारत सरकार’ व ‘उत्तर प्रदेश शासन’ की नेमप्लेट्स लगी थीं, ताकि वह खुद को वीआईपी दिखा सके। पुलिस को शक है कि इन गाड़ियों को खरीदने के लिए सौरभ ने धोखाधड़ी और उधारी का सहारा लिया।

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सौरभ की शान-शौकत यहीं खत्म नहीं होती थी। उसके पास निजी बॉडीगार्ड और ड्राइवर थे, जो उसे असली अधिकारी जैसा लुक देते थे। पुलिस ने उसके कब्जे से फर्जी IAS आईडी कार्ड, सचिवालय पास, ड्राइविंग लाइसेंस, दो मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, और आठ विभिन्न बैंकों के कार्ड बरामद किए। इसके अलावा, एक डायरी और अन्य संवेदनशील दस्तावेज भी मिले, जिनमें एनआईसी की फर्जी आईडी शामिल थी। सौरभ ने इस आईडी का इस्तेमाल कर कई राज्यों के अधिकारियों को मेल भेजकर सरकारी सुविधाएं हासिल की थीं।

सौरभ ने सोशल मीडिया को भी अपने फर्जीवाड़े का हथियार बनाया था। वह @Saurabh_IAAS नाम से एक ट्विटर अकाउंट चलाता था, जहां वह खुद को IAAS (Indian Audit and Accounts Service) अधिकारी बताता था। इस अकाउंट के जरिए वह अपनी फर्जी छवि को चमकाता और सरकारी कार्यक्रमों में शामिल होने का दावा करता था। पुलिस ने इस अकाउंट को डिलीट करवा दिया है और उसके नेटवर्क की जांच कर रही है।

पूछताछ में सौरभ ने कबूल किया कि वह लंबे समय से फर्जी IAS बनकर लखनऊ, नोएडा, और अन्य राज्यों में ठगी कर रहा था। वह सचिवालय की बैठकों में हिस्सा लेता, अधिकारियों पर दबाव डालता, और ट्रांसफर-पोस्टिंग से लेकर ठेके-पट्टों तक के लिए प्रभाव डालने की कोशिश करता था। उसने कई बड़े सरकारी कार्यक्रमों में वीआईपी प्रोटोकॉल के साथ शिरकत की थी। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि सौरभ ने किन-किन लोगों से आर्थिक लाभ उठाया और उसका नेटवर्क कितना बड़ा था।

इस मामले ने उत्तर प्रदेश प्रशासन में हड़कंप मचा दिया है। पुलिस उपायुक्त विश्वजीत श्रीवास्तव ने बताया कि सौरभ की गिरफ्तारी से एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि सौरभ ने इन गाड़ियों को कैसे हासिल किया और उसका असली मकसद क्या था। साथ ही, यह भी जांच की जा रही है कि क्या इस रैकेट में अन्य लोग भी शामिल थे। यह मामला एक बार फिर यह सवाल उठाता है कि कैसे फर्जी लोग सरकारी तंत्र को धोखा देकर समाज में रौब जमा सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशासन को ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए और सख्त कदम उठाने होंगे। आम जनता को भी सलाह दी जा रही है कि वे किसी के दावों पर आंख मूंदकर भरोसा न करें और संदिग्ध मामलों में पुलिस को सूचित करें।

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