मीरजापुर में गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान के पार
- अभिजीत श्रीवास्तव, मीरजापुर
मीरजापुर जनपद में गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे बाढ़ की आशंका गहराती जा रही है। प्रशासन द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, 3 अगस्त 2025 को सुबह 6 बजे ओझला पुल के पास गंगा नदी का जलस्तर 77.830 मीटर दर्ज किया गया, जो कि खतरे के निशान 77.724 मीटर से 10.6 सेंटीमीटर ऊपर है। यह स्थिति क्षेत्रवासियों और प्रशासन दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है।
जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) के मुताबिक, वर्तमान में गंगा नदी का जलस्तर 5.00 सेंटीमीटर प्रति घंटे की दर से बढ़ रहा है। यदि यह गति बनी रही, तो आने वाले दिनों में जलभराव और बाढ़ की स्थिति विकराल रूप ले सकती है। कई निचले इलाकों में जलभराव की शुरुआत हो चुकी है, और प्रशासन ने एहतियातन स्थानीय लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है।
गंगा नदी का अब तक का सर्वाधिक दर्ज जलस्तर वर्ष 1978 में 80.34 मीटर था। मौजूदा हालात उस ऐतिहासिक बाढ़ की याद दिला रहे हैं। पिछले वर्ष यानी 2024 में 17 सितंबर को अधिकतम जलस्तर 76.530 मीटर था, जो इस बार पहले ही पार हो चुका है। यदि वृद्धि की यही दर बनी रही तो आने वाले कुछ दिनों में 1978 के जलस्तर को छूना संभव लग रहा है, जिससे हालात गंभीर हो सकते हैं।
जिला प्रशासन ने हालात को देखते हुए NDRF और SDRF की टीमें सक्रिय कर दी हैं, जो लगातार गंगा के किनारे स्थित गांवों में निगरानी कर रही हैं। प्रशासन ने बाढ़ संभावित क्षेत्रों में नाव, राहत सामग्री और बचाव उपकरणों की व्यवस्था तेज कर दी है। निचले इलाकों के लोगों को अलर्ट रहने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल संपर्क करने के लिए निर्देश दिए गए हैं।
जिलाधिकारी कार्यालय से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि बाढ़ नियंत्रण केंद्र 24 घंटे क्रियाशील है और सभी संबंधित विभागों को सतर्क कर दिया गया है। बाढ़ की संभावित स्थिति से निपटने के लिए गांवों में अस्थायी राहत शिविरों की व्यवस्था भी की जा रही है।
प्रशासन की ओर से अपील की गई है कि गंगा तट और निचले इलाकों में रहने वाले लोग अतिरिक्त सतर्कता बरतें, बच्चों को अकेले नदी के किनारे न जाने दें, और आवश्यक दवाइयां व जरूरी दस्तावेजों को संभाल कर रखें। यदि स्थिति बिगड़ती है, तो तत्काल सुरक्षित स्थानों की ओर प्रस्थान करें और प्रशासन द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करें।