पूर्वांचल में कैंसर मरीजों की बढ़ती संख्या ने बढ़ाई चिंता, वाराणसी के अस्पतालों पर बढ़ा दबाव

  • ✍️ अभिजीत श्रीवास्तव, मीरजापुर | The Newswala

पूर्वांचल में कैंसर के मामलों में तेजी से हो रही वृद्धि अब एक गंभीर स्वास्थ्य संकट बनती जा रही है। वाराणसी स्थित टाटा कैंसर अस्पताल और अन्य निजी संस्थानों में मरीजों की बढ़ती भीड़ ने क्षेत्रीय स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की कमजोरियों को उजागर कर दिया है। चंदौली और मीरजापुर जिलों से वाराणसी पहुंचे मरीजों को सहायता देने वाले सामाजिक कार्यकर्ता चौधरी रमेश सिंह ने बताया कि 28 जुलाई 2025 को उन्होंने 8–10 कैंसर मरीजों को इलाज में सहयोग दिया। इनमें राजू सिंह, मनोहर सिंह, राजेश सिंह, प्यारे राम, पार्वती देवी, बी. सिंह, राकेश सिंह, चंदा देवी और बहादुर बियार जैसे मरीज शामिल थे, जिनका इलाज वाराणसी के विभिन्न अस्पतालों में जारी है।

रमेश सिंह ने बताया कि टाटा कैंसर अस्पताल में मरीजों की भीड़ इतनी ज्यादा है कि पैर रखने की भी जगह नहीं है। बढ़ते मामलों को देखते हुए शहर में कई निजी कैंसर क्लीनिक खुल गए हैं, जो यह दर्शाता है कि अब यह बीमारी एक इलाज नहीं, बल्कि एक महंगा व्यापार बन चुकी है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री राहत कोष, प्रधानमंत्री राहत कोष और आयुष्मान भारत योजना जैसे सरकारी सहायता कार्यक्रम गरीबों के नाम पर चलाए जा रहे हैं, लेकिन उनका असली फायदा निजी अस्पतालों को हो रहा है।

रमेश सिंह ने मांग की है कि सरकार कैंसर के इलाज को आपातकालीन श्रेणी में शामिल करे। जांच प्रक्रिया में ही दो-तीन महीने बीत जाते हैं और इलाज शुरू होते-होते कई मरीज दम तोड़ देते हैं। उन्होंने बताया कि उनके संपर्क में ऐसे कई मरीज हैं जिनकी जान इलाज में देरी या आर्थिक सहायता न मिलने के कारण चली गई। उन्होंने सरकार से अपील की है कि कैंसर मरीजों के लिए तेज, पारदर्शी और सुलभ व्यवस्था बनाई जाए। जब तक प्राथमिक चरण में जांच और समय पर इलाज की गारंटी नहीं दी जाएगी, तब तक मरीजों की जान बचाना मुश्किल है। चिकित्सा व्यवस्था को मुनाफे का केंद्र न बनाकर जनसेवा का माध्यम बनाना होगा।

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